Medical Education In Rajasthan: देश में 2000 से अधिक मेडिकल फैकल्टी पद खाली हैं। राजस्थान में हाल ही में खुले कई सरकारी मेडिकल कॉलेज बिना पूरी फैकल्टी के चल रहे हैं।
देश में डॉक्टर बनने की योग्यता मेहनत से नहीं, किस सिस्टम से पढ़े हैं इससे तय हो रही है। भारत में एमबीबीएस करने वाला छात्र चार बार फेल होने के बाद भी पांचवी बार परीक्षा दे सकता है, जबकि विदेश से एमबीबीएस करने वाला छात्र 150 में से 149 अंक लाकर भी डॉक्टर नहीं बन पाता। इस सिस्टम से निकले विद्यार्थियों को पीजी में माइनस 40 परसेंटाइल पर प्रवेश मिल सकता है, जबकि फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट एग्जाम (एफएमजीई) को पूरी तरह एक 'ब्लैक बॉक्स परीक्षा' बना दिया गया है। पत्रिका पड़ताल में सामने आया कि एफएमजीई 149 अंक लाने वाला छात्र बार-बार फेल घोषित होता है, लेकिन सिस्टम उससे संवाद तक नहीं करता। न प्रश्न पत्र सार्वजनिक होते हैं, न उत्तर कुंजी, न विस्तृत परिणाम। न री-चेकिंग, न री-टोटलिंग की व्यवस्था। छात्र यह तक नहीं जान सकता कि उसने कौन सा सवाल गलत किया।
देश में 2000 से अधिक मेडिकल फैकल्टी पद खाली हैं। राजस्थान में हाल ही में खुले कई सरकारी मेडिकल कॉलेज बिना पूरी फैकल्टी के चल रहे हैं। नेशनल मेडिकल कमीशन (एनएमसी) स्वयं कई कॉलेजों पर फैकल्टी और इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी के चलते भारी पेनल्टी लगा चुका है। ऐसे में सवाल यह है कि जब पढ़ाने वाले ही नहीं हैं, तो पढ़ाई की गुणवत्ता किस आधार पर तय हो रही है।
नेशनल एग्जिट टेस्ट (नेक्स्ट) की वर्ष 2019 से घोषणा हो रही है, तारीखें और फॉर्मेट कई बार बदले। एक बार तो छात्रों से फीस तक ले ली गई, फिर परीक्षा रद्द हो गई। छह साल में भी स्थायी गाइडलाइन नहीं बन पाई। NMC आज तक यह एडवाइजरी तक जारी नहीं कर सका कि विदेश में कहां एमबीबीएस करें और कहां नहीं।
एफएमजीई में असफल छात्रों की पीड़ा केवल परीक्षा तक सीमित नहीं, बल्कि न्याय की प्रक्रिया से रखे जाने की है। न उत्तर अधिकार, न पुनर्मूल्यांकन व्यवस्था विश्वसनीयता प खड़े करती हैं। ऐसे निर्ण मेडिकल शिक्षा की सार होगी। योग्य छात्रों का टूटेगा। आम मरीज के भी सवाल उठेगा कि उऊ करने वाला डॉक्टर किर खरा उत्तरा है।
एफएमजीई देश की सबसे महंगी परीक्षाओं में से एक है। भारी फीस और जीएसटी वसूली के बावजूद परीक्षा के बाद कोई पारदर्शी प्रक्रिया नहीं अपनाई जाती, जबकि इससे परीक्षा एजेंसी पर कोई अतिरिक्त खर्च भी नहीं आता।
(एक एफएमजीई की पीर
माइनस 40 परसेंटाइल पर पीजी में प्रवेश क्या मरीजों के लिए सुरक्षित है?
149 अंक लाने वाला छात्र अयोग्य है या सिस्टम असफल?