71 Year Old NEET Aspirant Ashok Bahar: युवा तो शायद फिर भी संभल जाएं लेकिन, जिंदगी के आखिरी पड़ाव पर खड़े 71 साल के इस बुजुर्ग को हमारा सिस्टम क्या जवाब देगा? मां का सपना पूरा करने निकले अशोक बहार की रुला देने वाली कहानी जो हमारे भ्रष्ट एजुकेशन सिस्टम के मुंह पर करारा तमाचा है।
NEET UG 2026 Paper Leak: भारत में जब भी नीट परीक्षा की बात होती है तो हमारे दिमाग में लाखों युवा छात्रों की तस्वीर उभरती है। लेकिन 3 मई को लखनऊ के एक एग्जाम सेंटर पर अलग ही नजारा था। 71 साल के अशोक बहार साधारण कुर्ते पजामे में, हाथ में पानी की बोतल और प्रश्न-पत्र लिए किशोरों की भीड़ के बीच से परीक्षा देकर बाहर निकले। वह वहां किसी करियर या नौकरी के लिए नहीं बल्कि अपनी मां से किया एक पुराना वादा निभाने गए थे। लेकिन उन्हें क्या पता था कि, सिस्टम की लापरवाही और पेपर लीक का खेल उनके जज्बे, मेहनत और सपने को पल भर में चकनाचूर कर देगा।
उत्तर प्रदेश के आलमबाग के चंदरनगर के रहने वाले अशोक बहार का ताल्लुक एक ऐसे परिवार से है जहां करीब 20 डॉक्टर हैं। उन्होंने सालों पहले अपनी मां से वादा किया था कि, वह भी अपने पिता की तरह डॉक्टर बनेंगे। लेकिन परिवार की जिम्मेदारियों और जीवन की भागदौड़ में यह सपना कहीं पीछे छूट गया। उन्होंने लखनऊ विश्वविद्यालय से एलएलबी और एमबीए की पढ़ाई की और रिटायर होने से पहले विदेश मंत्रालय में अपनी सेवाएं दीं। वह साल 2000 में रिटायर हो गए थे।
रिटायरमेंट के सालों बाद उन्होंने अपने उस अधूरे सपने को फिर से जीने का फैसला किया। उनकी पत्नी डॉ मंजुल बहार जो खुद एक गायनोलॉजिस्ट हैं उन्होंने, इस तैयारी में अशोक का पूरा साथ दिया। 71 साल की उम्र में जब लोग आराम की जिंदगी जीते हैं अशोक ने अपने पोते-पोतियों की उम्र के बच्चों के साथ बैठकर नीट यूजी 2026 की तैयारी की। उनका सपना हेपेटोलॉजी में विशेषज्ञता हासिल करना और लिवर की बीमारियों का इलाज करना था।
परीक्षा वाले दिन अशोक का उत्साह देखने लायक था। लेकिन कुछ ही दिनों बाद जब पेपर लीक की खबरें सामने आईं तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई।पेपर लीक नेटवर्क और परीक्षा रद्द होने की खबर ने सिर्फ युवा छात्रों के साथ ही 71 साल के इस बुजुर्ग को भी गहरे सदमे में डाल दिया।
जरा सोचिए उस व्यक्ति की मनोदशा क्या होगी जिसने, जीवन के इस पड़ाव पर आकर अपनी उम्र और सेहत की परवाह किए बिना दिन-रात एक कर दिए हों। एक तरफ जहां युवा स्टूडेंट्स इस झटके को बर्दाश्त कर सकते हैं वहीं, एक बुजुर्ग के लिए यह किसी बड़े आघात से कम नहीं है। एक भ्रष्ट सिस्टम और शिक्षा तंत्र की घोर लापरवाही ने ईमानदारी के साथ की गई इस कोशिश को मिट्टी में मिला दिया। पैसे वालों ने पेपर खरीद लिए और एक 71 साल के बुजुर्ग की सालों की मेहनत सरेआम बर्बाद हो गई।
अब जब परीक्षा रद्द हो चुकी है और दोबारा परीक्षा की तारीखें भी सामने आ गई हैं तो सवाल यह उठता है कि, क्या 71 साल के अशोक बहार फिर से वही एनर्जी और हिम्मत जुटा पाएंगे? एक इंसान जो जिंदगी के आखिरी पड़ाव पर अपनी मां का सपना पूरा करने निकला था आज सिस्टम की खामियों के आगे बेबस खड़ा है। अशोक की कहानी देश के लाचार सिस्टम की उस कड़वी सच्चाई को उजागर करती है, जो मेहनत करने वालों के जज्बात और सपनों की कोई कद्र नहीं करता।