Neet UG 2026 Exam Cancellation: दिन-रात एक करके पढ़ाई करने वाले छात्र जब सिस्टम की नाकामी देखते हैं, तो उनका टूटना लाजमी है। NEET और CUET जैसी बड़ी परीक्षाओं में लगातार हो रही धांधली ने युवाओं को डिप्रेशन के अंधेरे में धकेल दिया है। बार-बार पेपर लीक और परीक्षाएं रद्द होने की घटनाओं के कारण युवाओं का सिस्टम से भरोसा ही उठ गया है।
NEET Exam Paper Leak: भारत में इन दिनों नीट परीक्षा रद्द और पेपर लीक धांधली को लेकर माहौल गरमाया हुआ है, पूरे मामले में कई चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं। अब लगातार नीट, रीट और सीयूईटी जैसी देश की बड़ी परीक्षाओं में हो रही गड़बड़ियों ने जेन जेड (Gen Z) यानी आज की युवा पीढ़ी को बुरी तरह तोड़ दिया है। एक तरफ जहां स्टूडेंट्स पर पढ़ाई और करियर बनाने का भारी दबाव है वहीं दूसरी तरफ सिस्टम की नाकामी उनके मानसिक स्वास्थ्य पर बहुत बुरा असर डाल रही है।
हाल ही में नीट यूजी परीक्षा को लेकर जो बवाल हुआ है, उसने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। पेपर लीक और फिर अचानक परीक्षा रद्द होने की खबरों से उन छात्रों को सबसे बड़ा झटका लगा है जिन्होंने दिन-रात एक करके सालों तक इसकी तैयारी की थी। सिर्फ नीट ही नहीं बल्कि सीयूईटी जैसी अहम परीक्षा में भी सर्वर डाउन होने तकनीकी दिक्कतें आने और कुप्रबंधन के मामले सामने आए हैं। इन सब घटनाओं से स्टूडेंट्स के मन में अब यह सवाल उठने लगा है कि क्या उनकी ईमानदारी और मेहनत का कोई मोल बचा भी है।
आज के युवा जिन्हें जेन जेड कहा जाता है वे पहले से ही सोशल मीडिया भारी कंपटीशन और समाज की उम्मीदों के दबाव में जी रहे हैं। ऐसे में जब एग्जाम सिस्टम फेल होता है तो, उनका तनाव और हताशा कई गुना बढ़ जाता है। मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि परीक्षा रद्द होने या नतीजों में बार-बार देरी होने से स्टूडेंट्स में एंग्जायटी (घबराहट), डिप्रेशन और अनिद्रा के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। स्टूडेंट्स अपने करियर और भविष्य को लेकर बेहद असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।
लगातार हो रही इन धांधलियों से नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) और देश के पूरे एजुकेशन सिस्टम पर से स्टूडेंट्स और माता-पिता का भरोसा उठने लगा है। स्टूडेंट्स का साफ कहना है कि, वे परीक्षा की कठिन तैयारी तो कर सकते हैं लेकिन सिस्टम की कमियों और भ्रष्टाचार से आखिर कैसे लड़ें। दिन रात मेहनत करने वाले स्टूडेंट्स खुद को ठगा हुआ महसूस करते हैं जब, वे देखते हैं कि सिस्टम की खामियों का फायदा उठाकर अयोग्य लोग उनसे आगे निकल रहे हैं।
शिक्षा विशेषज्ञों और जानकारों का मानना है कि, अब वह समय आ गया है जब भारत के परीक्षा तंत्र में ऊपर से नीचे तक ठोस बदलाव किए जाएं। केवल कमेटियां बनाने या जांच के आदेश देने से काम नहीं चलेगा। परीक्षा प्रणाली को पूरी तरह से पारदर्शी, सुरक्षित और ट्रस्टेबल बनाना ही होगा ताकि, युवाओं का टूटा हुआ विश्वास दोबारा जीता जा सके। अगर जल्द ही जरूरी कदम नहीं उठाए गए तो हम अपनी होनहार पीढ़ी और देश के भविष्य को हताशा के अंधेरे में धकेल देंगे।