
NEET UG 2026 Exam (Image- ChatGPT)
NEET UG 2026 Cancelled: देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET UG 2026 एक बार फिर विवादों में आ गई है। पेपर लीक के आरोपों के बाद नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने 12 मई को परीक्षा रद्द करने का बड़ा फैसला लिया। इस फैसले से लाखों स्टूडेंट्स और उनके माता-पिता में भारी गुस्सा है क्योंकि लगातार मेहनत करने वाले बच्चे हर बार सिस्टम की गड़बड़ी का शिकार हो रहे हैं। अब सोशल मीडिया से लेकर कोचिंग सेंटरों तक एक ही मांग उठ रही है कि नीट परीक्षा को ऑफलाइन की जगह ऑनलाइन या हाइब्रिड मोड में कराया जाए।
यह पहली बार नहीं है जब, नीट परीक्षा में पेपर लीक का मामला सामने आया है। साल 2024 में भी पेपर लीक और ग्रेस मार्क्स को लेकर पूरे देश में भारी बवाल हुआ था। तब भी स्टूडेंट्स ने आरोप लगाया था कि, एनटीए की गड़बड़ियों से उनके नंबरों पर असर पड़ा और टॉपर्स की संख्या असामान्य रूप से बढ़ गई। उस विवाद के बाद केंद्र सरकार ने परीक्षा को सुरक्षित बनाने के लिए पूर्व इसरो प्रमुख के राधाकृष्णन की अध्यक्षता में एक एक्सपर्ट कमेटी बनाई थी। कमेटी ने कई बड़े बदलाव सुझाए थे लेकिन, दो साल बाद भी उन्हें पूरी तरह लागू नहीं किया जा सका।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार एनटीए अब नीट परीक्षा को कंप्यूटर आधारित टेस्ट (CBT) या हाइब्रिड मॉडल में बदलने की तैयारी कर रहा है। हालांकि इसके लिए अभी स्वास्थ्य मंत्रालय से मंजूरी मिलना बाकी है। एक प्रस्ताव यह भी है कि छात्रों को सवाल डिजिटल तरीके से स्क्रीन पर दिखाए जाएं लेकिन जवाब ओएमआर (OMR) शीट पर ही भरवाए जाएं। जानकारों का मानना है कि इससे पेपर लीक और तकनीकी खराबी दोनों का डर कम हो जाएगा। पूरी तरह ऑनलाइन परीक्षा में सर्वर डाउन होने का खतरा रहता है जबकि ऑफलाइन में पेपर लीक का। ऐसे में हाइब्रिड मॉडल सबसे सही विकल्प माना जा रहा है।
नीट 2026 परीक्षा रद्द होने का सीधा असर मेडिकल एडमिशन की प्रक्रिया पर पड़ेगा। दोबारा परीक्षा कराने के लिए नए एडमिट कार्ड जारी करने होंगे और नए सिरे से परीक्षा केंद्र बनाने होंगे। इस कारण रिजल्ट काउंसलिंग और एमबीबीएस व बीडीएस में एडमिशन कई हफ्ते लेट हो सकते हैं। मेडिकल कॉलेजों को अपना एकेडमिक कैलेंडर बदलना पड़ सकता है और सेमेस्टर छोटा करना पड़ सकता है। बार-बार हो रही इस देरी से स्टूडेंट्स पर मानसिक दबाव तो बढ़ ही रहा है और उनकी तैयारी का पूरा शेड्यूल भी बिगड़ रहा है।
सरकार की एक्सपर्ट कमेटी ने परीक्षा को सुरक्षित बनाने के लिए 95 अहम सुझाव दिए थे। इनमें सबसे खास सुझाव यह था कि, नीट जैसी बड़ी परीक्षा को धीरे-धीरे पेन और पेपर मोड से हटाकर हाइब्रिड सीबीटी मॉडल में बदला जाए। इसके अलावा पूरे देश में नया सिस्टम लागू करने से पहले इसके छोटे स्तर पर टेस्ट करने की बात कही गई थी। परीक्षा को एक ही दिन की बजाय अलग-अलग दिन और कई शिफ्ट में कराने का सुझाव भी दिया गया था ताकि सिस्टम पर एक साथ दबाव न पड़े।
कमेटी ने सिर्फ परीक्षा का तरीका बदलने की बात नहीं कही थी बल्कि एनटीए के काम करने के पूरे तरीके को बदलने की जरूरत बताई थी। रिपोर्ट में कहा गया था कि, एजेंसी को चलाने के लिए एक जवाबदेह बॉडी बनाई जाए। साथ ही टेस्ट ऑडिट और सुरक्षा के लिए अलग-अलग समितियां बनें। सबसे बड़ी बात यह कही गई थी कि, एनटीए में सामान्य अधिकारियों की जगह परीक्षा और तकनीक के जानकारों को जिम्मेदारी सौंपी जाए।
नीट यूजी 2026 रद्द होने के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि, क्या सरकार सच में परीक्षा प्रणाली में कोई बड़ा बदलाव करेगी या सब कुछ पहले की तरह ही चलता रहेगा। स्टूडेंट्स और शिक्षा से जुड़े लोगों का साफ कहना है कि अगर समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो हर साल युवाओं का भविष्य इसी तरह दांव पर लगता रहेगा।
Published on:
13 May 2026 06:40 pm
बड़ी खबरें
View Allशिक्षा
ट्रेंडिंग
