शिक्षा

नए भारत के निर्माण में छात्र भागीदारी निभाएं : उपराष्ट्रपति नायडू

उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू ने छात्रों से आह्वान किया कि वह नए भारत के निर्माण में अपनी भागीदारी निभाएं।

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Jul 15, 2018
Venkaiah Naidu

उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू ने छात्रों से आह्वान किया कि वह नए भारत के निर्माण में अपनी भागीदारी निभाएं। नायडू ने इंडियन पेट्रोलियम संस्थान (आईआईपी) में आयोजित इक्फाई विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए शनिवार को कहा कि सर्वधर्म समभाव तथा सबका साथ-सबका विकास की भावना ही सच्ची देशभक्ति है। उन्होंने कहा कि माता, जन्मभूमि, मातृ भाषा तथा गुरु का सदैव सम्मान करें। उप राष्ट्रपति ने कहा कि शिक्षा को रोचक के साथ ही नए ज्ञान तथा तकनीक के अनुरूप बनाना होगा।

उन्होंने कहा, हमारे विश्वविद्यालय विश्व के श्रेष्ठ विश्वविद्यालयों की सूची में अपना स्थान नहीं बना सके हैं। इसे हमें एक बड़ी चुनौती के तौर पर लेना चाहिए। छात्रों को कुछ समय गांवों में बिताना चाहिए। छात्रों को स्वच्छ भारत जैसी राष्ट्रीय महत्व की योजनाओं में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेना चाहिए। छात्र समाज तथा राष्ट्र के बारे में सोचें। देश के सभी नागरिक हमारे भाई-बहन हैं। नायडू ने उपाधि धारक छात्र-छात्राओं को बधाई देते हुए कहा कि आज दुनिया, सूचना तकनीक के कारण ग्लोबल विलेज में सिमट रही है। छात्रों को यह ज्ञान होना चाहिए कि नवीन ज्ञान तक कैसे पहुंचाया जाए, कैसे उसे जीवन में ग्रहण किया जाए। समन्वय, सहयोग व प्रतिस्पर्धा की भावना हो। हमारा लक्ष्य उत्कृष्टता तथा कार्यक्षमता में सुधार होना चाहिए। आज दुनिया बड़ी तेजी से आगे बढ़ रही है और कड़ी प्रतिस्पर्धा है।

सभी देश आज भारत की ओर देख रहे हैं
उपराष्ट्रपति ने कहा कि आज विद्यार्थियों के समक्ष अवसर होने के साथ ही अनेक चुनौतियां भी हैं। विश्वविद्यालयों को इन चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए छात्र-छात्राओं को शिक्षा देनी चाहिए। भारत दुनिया की छठी बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया है। यह हमारे लिए गौरव की बात है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सुधारों को ठोस तरीके से लागू कर रहे हैं। बड़े पैमाने पर आर्थिक और सामाजिक सुधार की योजनाएं शुरू की गई हैं। इनमें स्वच्छ भारत, बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ, नदियों का पुनर्जीवन, स्मार्ट सिटी, स्किल इंडिया, सभी के लिए आवास, डिजिटल इंडिया, मेक इन इंडिया आदि हैं। सभी देश आज भारत की ओर देख रहे हैं। देश को रिफार्म, परफोर्म और ट्रांसफॉर्म को अपनाना होगा।

प्रकृति का ध्यान रखें
नायडू ने कहा कि एक जमाने में भारत विश्व गुरु के तौर पर माना जाता था। अब एक बार फिर दुनिया में देश का मान बढ़ा है। हमें इन अवसरों का उपयोग देश की अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने में करना चाहिए। विकास समावेशी होना चाहिए। उपराष्ट्रपति ने कहा कि हमारी सबसे बड़ी ताकत हमारी युवा शक्ति है। उन्होंने युवाओं से बड़े सपने देखने तथा बड़े लक्ष्य रखने के साथ ही कठिन परिश्रम करने का भी आह्वान किया। उन्होंने कहा, स्वामी विवेकानंद की यह उक्ति कि 'जागो, उठो व तब तक न रुको जब तक लक्ष्य तक पहुंच न जाओ' आज की परिस्थितियों में और भी ज्यादा प्रासंगिक है। विज्ञान, तकनीक, समाज और मानवता की बेहतरी के लिए होते हैं। हमें प्रकृति का ध्यान रखना चाहिए। संरक्षित प्रकृति से ही सुरक्षित भविष्य सम्भव है। हमारे सामने ग्लोबल वॉर्मिंग, घटती जैव विविधता, पेयजल की कमी, अपशिष्ट प्रबंधन की कमी आदि कई समस्याएं हैं।

ज्ञान का विस्तार करती है शिक्षा
उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों को इन समस्याओं के निवारण में अपनी भूमिका निभानी चाहिए। शिक्षा केवल रोजगार तक ही सीमित नहीं है, बल्कि शिक्षा ज्ञान का विस्तार करती है। बालिकाओं को भी समान शिक्षा के अवसर मिलने चाहिए। भारतीय संस्कृति में महिलाओं के प्रति सम्मान की परम्परा रही है। हम हमेशा वसुधैव कुटुम्बकम में विश्वास रखते हैं। विविधता में एकता-हमारी विशेषता है।

ज्ञान की कोई सीमा नहीं होती
राज्यपाल डॉ. कृष्ण कांत पाल ने कहा कि विद्यार्थियों का चरित्र निर्माण क्लास रूम में होता है और वही से राष्ट्र निर्माण भी होता है। हमारी शिक्षण संस्थाओं और विश्वविद्यालयों को विभिन्न सम-सामयिक चुनौतियों में सकारात्मक भूमिका निभानी होगी जिससे यहां पढऩे वाले विद्यार्थी मजबूती से अपने पैरों पर खड़े हो सकें तथा दुनिया का सामना करें। मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने कहा कि यह अवसर स्नातकों को अपनी दीक्षा एवं शिक्षा को पूर्णकर दीक्षांत के बाद जीवन के गंतव्य की ओर बढऩे का है। ज्ञान की कोई सीमा नहीं होती, यह केवल एक पड़ाव है, जहां आप अपनी शिक्षा पूरी करके जा रहे हैं। आपके सामने समाज के लिए कुछ करने और योगदान देने की बड़ी अहम जिम्मेदारियां हैं। किसी भी प्रकार का ज्ञान तभी मूल्यवान है, जब वह इस पृथ्वी पर मनुष्य मात्र के कल्याण और विकास का साधन बनता है। रावत ने कहा कि इस अवसर पर एमबीए, बीटेक, बीबीए, एलएलबी एवं बीएड के स्नातकों को 8 गोल्ड मेडल, 8 सिल्वर मेडल प्रदान किए गए। साथ ही विभिन्न पाठ्यक्रमों के कुल लगभग 249 स्नातकों को उपाधि प्रदान की गई।

Published on:
15 Jul 2018 01:08 pm
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