
Sudarshan Nikam Biography: सुबह जल्दी उठना, मंडी जाना, वहां सब्जी चुनना और फिर वापस आकार दुकान खोलना, उसके बाद स्कूल के लिए भागना- सुदर्शन निकम के लिए cgयह आम जिंदगी थी। हालांकि, इस आम जिंदगी में भी उन्होंने अपने खास सपनों को मरने नहीं दिया। मेहनत की, मुश्किलों से दो-दो हाथ किए और आज CA बनकर सैकड़ों युवाओं को आगे बढ़ने की सीख दे रहे हैं। सुदर्शन मूलरूप से महाराष्ट्र के नादरपुर गांव के रहने वाले हैं। उनके पैरेंट्स सब्जी की ठेल लगाया करते थे और वह इस काम में उनका हाथ बंटाते। दूसरे बच्चों की तरह सुदर्शन पढ़ाई से भागते नहीं थे, बल्कि उन्हें किताबों का साथ अच्छा लगता था। उनके पैरेंट्स ने भी हमेशा उन्हें पढ़ाई के लिए प्रेरित किया।
सुदर्शन निकम शुरुआत से पढ़ाई में अच्छे थे। इसलिए उनके माता-पिता ने सोच लिया था, उन्हें हर हाल में पढ़ाना है। काम के सबसे व्यस्त दिनों में भी उन्होंने सुनिश्चित किया कि सुदर्शन एक भी दिन स्कूल की छुट्टी न करें। सुदर्शन ने भी अपने पैरेंट्स को कभी निराश नहीं किया। वह स्कूल भी जाते और माता-पिता का हाथ भी बंटाते। 10वीं कक्षा के बाद, सुदर्शन ने साइंस स्ट्रीम चुनी, क्योंकि वह डॉक्टर बनना चाहते थे। हालांकि, मेडिकल की पढ़ाई का खर्च उनके परिवार की पहुंच से बाहर था। वह निराश जरूर हुए, लेकिन एक नया रास्ता चुना और उस पर मजबूती से चलना शुरू कर दिया।
अपने भाई की सलाह पर उन्होंने कॉमर्स की पढ़ाई की, 2019 में अपना बीकॉम पूरा किया और 'इंस्टीट्यूट ऑफ़ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ़ इंडिया' में दाखिला ले लिया। उन्होंने 2017 में CA परीक्षाओं की तैयारी शुरू कर दी थी। हालांकि, यह सफर आसान नहीं था। कभी भाषा रोड़ा बनी, तो कभी आर्थिक चुनौतियों ने रास्ता रोकने का प्रयास किया, लेकिन सुदर्शन कहां रुकने वाले थे। हर मुश्किल का डटकर सामना किया और मंजिल पर पहुंच गए। अपने संघर्ष के दिनों को याद करते हुए सुदर्शन कहते हैं-कई बार ख्याल आया कि क्या ये दुनिया मेरे लिए है? फिर मैंने खुद को समझाया कि मैं इसी दुनिया के लिए बना हूं। मैंने कई दिन लाइब्रेरी में 10–12 घंटे पढ़ाई की। मां को मेरी कोचिंग फीस भरने के लिए पर्सनल लोन तक लेना पड़ा।
सीए इंटरमीडिएट पास करने के बाद सुदर्शन आर्टिकलशिप के लिए पुणे चले गए। जून 2025 में वह एक लक्ष्य के साथ मुंबई पहुंचे, वो था अपने माता-पिता को बेहतर जिंदगी देना। सितंबर 2025 में उन्होंने सीए फाइनल पास किया। रिजल्ट चेक करते समय उनके हाथ कांप रहे थे, जैसे ही उन्हें पता चला कि आखिरकार उन्हें मंजिल मिल गई है, तो उनकी आंखों से खुशी के आंसू निकल आए। सुदर्शन के पैरेंट्स के लिए भी यह एक सपने के पूरा होने जैसा है। महज 7 क्लास तक पढ़े उनके पिता फूले नहीं समाते हैं, केवल इतना ही कहते हैं- अब जाकर मुझे चैन आया है। सुदर्शन निकम की सक्सेस स्टोरी बताती है कि अगर मन में कुछ ठान लें और पूरी लगन से मंजिल की तरफ बढ़ें तो हर लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।