चुनाव

UP Assembly Elections 2022 : बेहिसाब खर्च का हिसाब देने में प्रत्याशियों को आया पसीना,प्रचार करें या भरे रजिस्टर

UP Assembly Elections 2022 निर्वाचन आयोग ने इस बार प्रत्याशियों पर कुछ ज्यादा ही सख्ती की हुई है। यहीं कारण है कि इस बार प्रत्याशियों को पाई—पाई का हिसाब देना पड़ रहा है। हालांकि ये व्यवस्था पहले से निर्वाचन आयोग द्वारा बनाई गई है। लेकिन इस बार सख्ती कुछ अधिक ही है। इस बार व्यय पर्यावेक्षक भी तैनात किए गए हैं। जिनका कम ही प्रत्याशियों के खर्चें पर नजर रखना है। अब कुछ प्रत्याशी तो प्रचार छोड़कर व्यय रजिस्टर पूरा करने में समय लगा रहे हैं।

2 min read
Feb 07, 2022
UP Assembly Elections 2022 : चुनाव में खर्च हो गए बेहिसाब का हिसाब देने में ठंड में प्रत्याशियों को आया पसीना

UP Assembly Elections 2022 इस बार निर्वाचन आयोग की सख्ती के आगे प्रत्याशियों के इतनी तेज ठंड में भी पसीने छूट रहे हैं। इस बार खर्च का हिसाब देने के लिए आयोग ने काफी सख्ती की है। चुनावी खर्च और प्रत्याशियों पर निगरानी के लिए प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र प्रेक्षकों और फ्लाइंड दस्ते की निगरानी में हैं। इसके साथ ही प्रत्याशियों के रजिस्टर की जांच के अलावा उनके खर्च का हिसाब भी लिया जा रहा है। चुनाव प्रचार और चाय नाश्ते में प्रत्याशियों ने अब तक बेहिसाब खर्च कर दिया है। जिसका हिसाब देने में अब प्रत्याशियों को पसीना आ रहा है।

प्रत्याशियों ने अपने मुख्य कार्यालय के पास ही कार्यकर्ताओं के खाने और चाय नाश्ते की व्यवस्था की थी। जो कि प्रेक्षकों की निगाह से बच नहीं सके। बता दें कि इस बार निर्वाचन आयोग ने विधानसभा चुनाव में प्रत्याशियों के खर्च की सीमा बढ़ाकर 40 लाख रुपये कर दी है। लेकिन इस सीमा के साथ ही तमाम खर्च भी उस लिस्ट में शामिल कर दिए हैं। जिसका हिसाब प्रत्याशी को देना होगा। इसमें कार्यालय के लिए लाई गई चाय गिलास से लेकर प्रचार वाहन तक का हिसाब देना होगा और उसको रजिस्टर में दर्ज करना होगा। लेकिन प्रत्याशियों को इस हिसाब को रजिस्टर में लिखने में पसीना आ गया है। कहां कितना खर्च हुआ इसका कोई हिसाब उनके पास नहीं बचा है। अब मतदान को मात्र 4 दिन शेष रह गए हैं।

ऐसे में निर्वाचन आयोग ने भी प्रत्याशियों को हिसाब देने के लिए सख्ती कर दी है। बता दे कि मेरठ की सभी सात विधानसभा सीटों पर 80 उम्मीदवार चुनाव लड़ रहे हैं। इनमें से अधिकांश ने अपना खर्च रजिस्टर ही तैयार नहीं किया है। निर्वाचन आयेाग ने रजिस्टर जांच के लिए समय निर्धारित किया है। लेकिन इस तय समय में कोई प्रत्याशी अपना रजिस्टर पूरा नहीं कर सका। वहीं प्रत्याशियों का कहना है कि प्रचार के लिए खर्च किए गए रूपये का हिसाब देने में परेशानी होती है। कहां कैसे कितना रूपया खर्च हुआ यह पता नहीं चल पाता है।

Published on:
07 Feb 2022 04:01 pm
Also Read
View All