
Kerala Assembly Elections 2021 अपनी प्राकृतिक सुन्दरता के लिए प्रसिद्ध केरल कई मायनों में अनूठा है। केरल देश का पहला और एकमात्र ऐसा राज्य है जहां सौ फीसदी साक्षरता है लेकिन केरल ही देश का वो पहला राज्य है जहां की जनता ने सबसे पहले वामपंथ पर भरोसा जताते हुए लेफ्ट पार्टीज को सत्ता सौंपी। केरल की राजनीति को समझने के लिए हमें इसके राजनीतिक इतिहास को भी समझना होगा।
यहां के राजनीतिक इतिहास को देखा जाए तो केरल की जनता शुरू से ही वामपंथ के प्रभाव में रही है। वर्ष 1956 में केरल की स्थापना के साथ ही वर्ष 1957 में पहला विधानसभा चुनाव हुआ। इस चुनाव में कांग्रेस ने 37.84 फीसदी मत प्राप्त किए जबकि कम्यूनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (CPI) ने 35.28 फीसदी वोट जीत कर दूसरा स्थान हासिल किया हालांकि अधिक सीटें जीत कर सरकार भी सीपीआई ने ही बनाई। इस तरह राज्य में पहले विधानसभा चुनावों से ही यहां की राजनीति में लेफ्ट की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। तब से लेकर आज कर राज्य में कोई भी दक्षिणपंथी या मध्यमार्गी दल अपनी पहचान बनाने में एक स्तर से आगे नहीं बढ़ पाया है।
पिछले चुनावों में भाजपा ने दर्ज कराई अपनी उपस्थिति
वर्तमान में यहां पर कई राजनीतिक पार्टियां हैं जिनमें कम्यूनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया मार्किस्ट (CPIM), कांग्रेस, कम्यूनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (CPI), इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग जैसी पार्टियों के साथ ही भारतीय जनता पार्टी भी शामिल हैं। इस सभी पार्टियों में जहां बाकी पार्टियां कम या ज्यादा वामपंथ से प्रभावित हैं वही भाजपा पूरी तरह से दक्षिणपंथी दल है जो राज्य की राजनीति में अपना अस्तित्व बनाने के लिए खूब जोर लगा रहा है। वर्ष 2016 में हुए आम विधानसभा चुनावों में भाजपा 10.6 फीसदी वोट ले कर तीसरा स्थान पाने में कामयाब रही थी।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार देखा जाए तो इस समय राज्य में ध्रुवीकरण के चलते भाजपा की सीटों की संख्या बढ़ सकती है, हालांकि कितनी सीटों पर पार्टी जीत सकती है, यह कहना कठिन है। अगर हाल ही के सर्वों को देखा जाए तो पार्टी को दहाई के स्तर तक पहुंचने के लिए भी बहुत जोर लगाना पड़ेगा।