Uttar Pradesh Assembly Election 2022 राजनीति में दोस्त बने दुश्मन, भाई से भिड़ रहा है भाई। यह कहानी यही नहीं खत्म होती है। वक्त में किस कदर बदलाव आ गया है देखिए गुरु, शिष्य को ही चुनौती दे रहा है। यह तो छोड़िए पति-पत्नी भी राजनीति के इस खेल में एक दूसरों के खिलाफ ताल ठोंक रहे हैं।
जो कभी गहरे मित्र, मार्गदर्शक और अनुयायी भी थे, लेकिन आज राजनीति ने उनके रिश्ते में दरार पैदा कर दी है। चुनावी जंग में वे एक-दूसरे के खिलाफ खड़े हैं। आइएएनस की रिपोर्ट के अनुसार बिजनौर की धामपुर सीट से मूलचंद चौहान अपने शिष्य नईम-उल-हसन के खिलाफ खड़े हैं। नईम समाजवादी पार्टी (सपा) के टिकट पर और मूलचंद बसपा के उम्मीदवार हैं। नईम ने कहा, यह राजनीति है और हर किसी को चुनाव लडऩा होता है। मुझे अपने गुरु के खिलाफ चुनाव लडऩा पसंद नहीं था, लेकिन कुछ चीजें जरुरी होती हैं।
राजा और सेवक आमने-सामने
प्रतापगढ़ में निर्दलीय विधायक रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया और उनके अनुचर गुलशन यादव के बीच घमासान लड़ाई चल रही है। समाजवादी पार्टी ने गुलशन यादव को मैदान में उतारा है, जबकि राजा भैया अपनी जनसत्ता दल के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं। राजा भैया 1993 से कुंडा सीट जीत रहे हैं और लड़ाई काफी हद तक एकतरफा रही है, लेकिन गुलशन यादव ने उनके खिलाफ ही ठाल ठोंक दी है। राजा भैया ने अपने खिलाफ गुलशन यादव के अभियान को खारिज कर दिया और कहा, चलो अन्य चीजों के बारे में बात करते हैं। वहीं गुलशन ने कहा, समाजवादी पार्टी के पक्ष में लहर है और मैं यह सीट जीतकर इतिहास रचूंगा।
भाई-भाई लड़ रहे
फिरोजाबाद में सैफुर-रहमान सपा के उम्मीदवार हैं और उनके प्रतिद्वंद्वी उनके दोस्त अजीम भाई की पत्नी शाजिया हैं, जो बसपा उम्मीदवार हैं। सैफुर-रहमान, कभी अजीम भाई के लिए प्रचार करते थे, लेकिन राजनीति ने अब उन्हें एक दूसरे के खिलाफ कर दिया है। ललितपुर से राम रतन कुशवाहा भाजपा के उम्मीदवार हैं, जबकि उनके चचेरे भाई रमेश कुशवाहा सपा के उम्मीदवार हैं। पहले, रमेश अपने चचेरे भाई के लिए प्रचार करते थे, लेकिन अब उनके रास्ते अलग हो गए हैं।
पति-पत्नी लड़ रहे
बृजलाल खबरी ललितपुर के मेहरोनी से कांग्रेस के उम्मीदवार हैं, जबकि उनकी पत्नी उर्मिला खबरी कांग्रेस के टिकट पर उरई से चुनाव लड़ रही हैं। उनके रिश्तेदार श्री पाल उरई सीट से उर्मिला खबरी के खिलाफ बसपा के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं। एक रिश्तेदार ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, हम इन चुनावों में परिवार में पार्टी नहीं बनना चाहते हैं। जो हुआ है, वह दुर्भाग्यपूर्ण है और हमें उम्मीद है कि चुनाव खत्म होने के बाद मतभेद दूर हो जाएंगे।