UP Assembly 2022 Election Result Live : यूपी विधान सभा चुनाव 2022 में जहां भाजपा ने जमकर प्रचार किया तो बसपा ने सिर्फ दिखावे के लिए प्रचार किया। पर सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने 131 चुनावी रैलियां और रोड शो किए। कांग्रेस महासचिव व यूपी प्रभारी प्रियंका गांधी ने अन्य पार्टियों के शीर्ष नेताओं के मुकाबले 209 रैलियां और रोड शो किए। कहा जा रहा है कि भाजपा के प्रचार ने उसे काफी हद तक जीत दिलाई।

Uttar Pradesh Assembly Elections Result 2022 यूपी विधानसभा चुनाव में जिन क्षेत्रों में राजनीतिक दलों ने धुंआधार प्रचार किया वहां उन्हें अपेक्षित परिणाम मिला। भाजपा पश्चिमी यूपी और पूर्वांचल में अपने को कमजोर मानकर चल रही थी वहां पीएम नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह सहित भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा से सर्वाधित रैलियां और जनसभाएं कीं। इन दोनों ही क्षेत्रों में भाजपा का सर्वाधिक लाभ मिला। पूर्वांचल में जहां क्षेत्रीय क्षत्रपों की जातीय राजनीति ढेर हो गयी वहीं पश्चिमी यूपी में किसान आंदोलन का असर कम करने में भाजपा कामयाब रही। इस तरह जीत के जादुई आंकड़ों ने यूपी को एक बार फिर भगवामय कर दिया।
भाजपा ने जमकर किया प्रचार
भाजपा की तरफ से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, गृह मंत्री अमित शाह, भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पूरे प्रदेश में जगह-जगह ताबड़तोड़ रैलियां और जनसभाएं कीं। वैसे उनके निशाने पर सभी विपक्षी दल रहे, लेकिन भाजपा का विशेष जोर सपा पर हमले बोलने पर ही रहा। जिसमें वह कामयाब रही।
मायावती ने कीं सबसे कम रैलियां
सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने 131 चुनावी रैलियां और रोड शो किए। कांग्रेस महासचिव व यूपी प्रभारी प्रियंका गांधी ने अन्य पार्टियों के शीर्ष नेताओं के मुकाबले 209 रैलियां और रोड शो किए। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने सिर्फ रायबरेली में वर्चुअल रैली को संबोधित किया। पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने अमेठी तथा वाराणसी में दो रैलियों में शिरकत की। लेकिन कांग्रेस को अपेक्षित सफलता नहीं मिली। जबकि मायावती ने आधा दर्जन से भी कम रैलियों में भाग लिया। इसका खामियाजा बसपा को भुगतना पड़ा।
पश्चिमी में विरोध के बावजूद हुआ फायदा
पश्चिमी यूपी में पहले दो चरणों में मतदान हुए थे। किसान आंदोलन का यहां जर्बदस्त प्रभाव था। माना जा रहा था कि भाजपा को पश्चिमी यूपी में जबरदस्त नुकसान होगा। लेकिन भाजपा ने इसे अच्छी तरह से मैनेज कर लिया। किसान नेताओं ने जिस लखीमपुर खीरी को आंदोलन का केंद्र बनाया था, वहां भाजपा आठ में से आठ सीट जीतने में सफल रही। पश्चिमी यूपी में राष्ट्रीय लोकदल का वोट प्रतिशत बढ़कर सिर्फ 3.36 प्रतिशत तक ही पहुंचा। भले ही ध्रुवीकरण का लाभ सपा गठबंधन को मिला लेकिन सपा के मुकाबले भाजपा को ज्यादा सीटें मिलीं।