
Kangana Ranaut On Vande Mataram Controversy: राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ को लेकर छिड़ी बहस अब बॉलीवुड तक पहुंच गई है। दिग्गज अभिनेत्री शर्मिला टैगोर के बयान के बाद अभिनेत्री और बीजेपी सांसद कंगना रनौत ने सोशल मीडिया के जरिए अपनी प्रतिक्रिया दी है। कंगना ने ‘वंदे मातरम्’ में देवी स्वरूपों के उल्लेख और धार्मिक मान्यताओं को लेकर चल रही बहस पर अपनी राय रखते हुए कहा कि कला को समझने के लिए उसके संदर्भ और भाव को देखना जरूरी है।
कंगना रनौत ने अपनी पोस्ट में लिखा कि कला का एक महत्वपूर्ण पहलू उसकी व्याख्या है। उन्होंने समझाने की कोशिश की कि शक्ति, दुर्गा और चंडी जैसे शब्द धार्मिक संदर्भ में देवी के रूप में देखे जा सकते हैं, लेकिन किसी स्वतंत्रता गीत या राष्ट्रभक्ति की रचना में उनका इस्तेमाल अलग भाव और प्रतीक के तौर पर भी किया जा सकता है।
कंगना के मुताबिक, ‘वंदे मातरम्’ में शक्ति का उल्लेख केवल धार्मिक पूजा के अर्थ तक सीमित करके नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने इसे भीतर मौजूद शक्ति, साहस और उग्र ऊर्जा के प्रतीक के तौर पर समझने की बात कही।
कंगना ने अपनी पोस्ट में उन धार्मिक मान्यताओं पर भी टिप्पणी की, जिनमें केवल एक ईश्वर की अवधारणा को माना जाता है। उन्होंने सवालिया और तीखे अंदाज में कहा कि अगर किसी धर्म की मान्यता केवल एक ईश्वर और पुरुष प्रधान अभिव्यक्ति तक सीमित है तो इसके आधार पर कला की व्याख्या तय नहीं की जानी चाहिए।
अभिनेत्री ने आगे संकेत दिया कि ‘वंदे मातरम्’ को लेकर उठाया जा रहा यह मुद्दा पूरे समाज की सामूहिक भावना का प्रतिनिधित्व नहीं करता, बल्कि इसे कुछ लोगों का नजरिया माना जाना चाहिए। अपनी पोस्ट के अंत में उन्होंने इसे ‘selective issue’ यानी चुनिंदा मुद्दा बताया।
दरअसल, शर्मिला टैगोर ने हाल ही में ‘वंदे मातरम्’ को लेकर कहा था कि भारत जैसे विविध धार्मिक मान्यताओं वाले देश में इसके शुरुआती दो अंतरों को प्राथमिकता देना उचित हो सकता है। उनका तर्क था कि देश में ऐसे लोग भी हैं जो एक ही ईश्वर में विश्वास रखते हैं और ऐसे में गीत के उन हिस्सों को लेकर असहजता हो सकती है, जिनमें अलग-अलग देवी स्वरूपों का उल्लेख मिलता है।
शर्मिला टैगोर की इस टिप्पणी के बाद ‘वंदे मातरम्’ को लेकर बहस और तेज हो गई। इसी बीच कंगना रनौत ने इंस्टाग्राम पर एक पोस्ट शेयर करते हुए इस पूरे मुद्दे पर अपनी बात रखी।
‘वंदे मातरम्’ भारत के स्वतंत्रता आंदोलन से गहराई से जुड़ा हुआ गीत है। इसके इतिहास, पाठ और सार्वजनिक कार्यक्रमों में इसके इस्तेमाल को लेकर समय-समय पर चर्चा होती रही है। हालिया विवाद में जहां कुछ लोग पूरे गीत के गायन और इसके मूल स्वरूप पर जोर दे रहे हैं, वहीं कुछ लोग धार्मिक विविधता को देखते हुए शुरुआती हिस्सों को पर्याप्त मानते हैं।
ऐसे में शर्मिला टैगोर की टिप्पणी और उसके बाद कंगना रनौत की प्रतिक्रिया ने इस बहस को नया राजनीतिक और सामाजिक कोण दे दिया है। दोनों अभिनेत्रियों की राय के बीच अंतर ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि राष्ट्रभक्ति की अभिव्यक्ति और धार्मिक विविधता के बीच संतुलन किस तरह बनाया जाए।