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‘रामायण’ के आर्य सुमंत की संघर्षभरी कहानी, रोटी के लिए कभी की चौकीदारी तो कभी खींची ट्रॉली

Chandrashekhar Vaidh Struggle Story: दिग्गज अभिनेता चंद्रशेखर वैद्य ने अपने करियर में 100 से अधिक फिल्मों में अभिनय किया था लेकिन इनको लोकप्रियता रामानंद सागर की रामायण के आर्य सुमंत के किरदार से मिली थी। लेकिन इनके करियर का संघर्ष बहुत कठिन था। आइये जानते हैं इस एक्टर के संघर्ष की कहानी।
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Updated: 16 May 2026, 6:01 PM IST
Chandrashekhar Vaidh Struggle Story
‘रामायण’ के आर्य सुमंत की संघर्षभरी कहानी। (फोटो सोर्स: IMDb)

Chandrashekhar Vaidh Struggle Story: भारतीय सिनेमा और टेलीविजन जगत के दिग्गज अभिनेता चंद्रशेखर वैद्य अभिनय जगत का वो नामचीन सितारा थे, जिसने अपने पांच दशक से भी लंबे करियर में 100 से अधिक फिल्मों में जबरदस्त अभिनय का प्रदर्शन किया, लेकिन उन्हें सबसे ज्यादा पहचान रामानंद सागर की रामायण में राजा दशरथ के विश्वसनीय मंत्री आर्य सुमंत के किरदार से मिली। इस किरदार के कारण वो दुनियाभर में मशहूर हो गए थे। इतना ही नहीं लोग उन्हें असल जिंदगी में भी 'सुमंत' के किरदार से ही पहचानते थे।

संघर्षों से भरी थी शुरूआती जिंदगी (Chandrashekhar Vaidh Struggle Story)

चंद्रशेखर वैद्य को अपनी जिंदगी में मिली सफलता की राह आसान नहीं थी। एक वक्त था जब दो वक़्त की रोटी जुटाने के लिए उन्होंने रातों को जागकर दूसरों की हिफाजत का जिम्मा उठाया और चौकीदारी की, और ट्रॉली खींचने जैसा मुश्किल काम भी किया। ये वो दौर था जब फिल्मी दुनिया का ख्वाब तो था, पर जेब में पैसे नहीं थे। लेकिन चंद्रशेखर ने कभी हालात के आगे घुटने नहीं टेके।

दोस्तों के कहने पर मुंबई आए

दोस्तों के कहने पर वो अपनी किस्मत आजमाने मुंबई आए और काफी जद्दोजहद के बाद बॉलीवुड फिल्मों में कदम रखा। हर छोटे काम को उन्होंने उसी ईमानदारी और लगन से किया जो बाद में उनकी अदाकारी में भी दिखाई दी। चंद्रशेखर वैद्य ने 100 से अध‍िक फिल्‍मों में छोटे-बड़े रोल किए। लेकिन उनकी निजी जिंदगी बहुत संघर्षों से भरी रही। चंद्रशेखर वैद्य की 13 साल की उम्र में ही शादी हो गई थी। वह पढ़ना चाहते थे, लेकिन 7वीं कक्षा तक की ही पढ़ाई कर पाए। इसके बाद चंद्रशेखर वैद्य की ऐक्टिंग में एंट्री हो गई।

बता दें कि उन्होंने साल 1954 में 'औरत तेरी ये कहानी' से ऐक्‍ट‍िंग की दुनिया में कदम रखा। और बतौर नायक उनकी पहली फिल्म 'सुरंग' थी। इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा और 'गेटवे ऑफ इंडिया', 'बरसात की रात' और 'बसंत बहार' जैसी चर्चित फिल्मों में उन्होंने सपोर्टिंग एक्टर के रूप में अपनी पहचान बनाई।

जब फिल्में नहीं मिली तो बने असिस्टेंट डायरेक्टर

1964 और 1966 में उन्होंने बतौर निर्माता दो फिल्में बनाईं, लेकिन धीरे-धीरे उनका अभिनय करियर ढलान पर आने लगा। जब काम मिलना कम हुआ तो उन्होंने 50 साल की उम्र में भी हार नहीं मानी और अस्सिस्टेंट डायरेक्टर के रूप में काम करना शुरू कर दिया। 'परिचय', 'अचानक' और 'आंधी' जैसी यादगार फिल्मों में वो बतौर अस्सिस्टेंट डायरेक्टर ही नजर आए। यह उनके समर्पण और सिनेमा के प्रति गहरे प्रेम का प्रमाण था।

रामायण का वो यादगार सीन

बता दें कि चंद्रशेखर को उनके करियर का सबसे बड़ा और यादगार किरदार और पहचान रामानंद सागर की 'रामायण' से मिली। यूं तो आर्य सुमंत का किरदार कोई बड़ी भूमिका नहीं थी, लेकिन रामायण में उनका वो सीन आज भी करोड़ों दर्शकों के दिलों में जिंदा है, जब राम, सीता और लक्ष्मण वनवास के लिए अयोध्या छोड़ते हैं और आर्य सुमंत उन्हें अपने रथ में विदा करने जाते हैं। उस दृश्य में चंद्रशेखर की आंखों का दर्द और उनकी भावुक अभिनय ने हर घर में अपनी छाप छोड़ी।

नींद में ही हुआ निधन, परिवार ने की पुष्टि

जानकारी के लिए बता दें कि 16 जून 2021 को इस दिग्गज अभिनेता ने दुनिया को अलविदा कह दिया। ख़बरों के मुताबिक, उनके बटे ने उनके निधन की खबर शेयर करते हुए बताया था कि उन्हें कोई गंभीर स्वास्थ्य समस्या नहीं थी और वे हाल ही में अस्पताल से चेकअप के बाद स्वस्थ होकर लौटे थे। इसके साथ ही उन्होंने ये भी बताया कि नींद में ही उन्होंने अपनी अंतिम सांस ली थी।

एक साधारण पृष्ठभूमि से निकलकर भारतीय सिनेमा की दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाने वाले चंद्रशेखर का यह सफर प्रेरणादायक था।

Updated on:
16 May 2026, 6:01 PM IST
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