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भालू गुड़-शक्कर खा रहा, पी रहा तेल

ग्राम दैहान में जंगली भालू से ग्रामीणों में दहशत है। भालू घरों में घुसकर रसोई में रखा गुड़, शक्कर व तेल खा-पी रहा है। लोग रात में छतों पर टॉर्च की रोशनी से पहरा दे रहे हैं।
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ग्राम दैहान में जंगली भालू से ग्रामीणों में दहशत है। भालू घरों में घुसकर रसोई में रखा गुड़, शक्कर व तेल खा-पी रहा है। लोग रात में छतों पर टॉर्च की रोशनी से पहरा दे रहे हैं। स्कूली बच्चों को वन कर्मी अपनी सुरक्षा में स्कूल छोड़ते हैं और वापस गांव लाते हैं।

बालोद ब्लॉक के आखिरी छोर पर बसे ग्राम दैहान में पिछले एक सप्ताह से जंगली भालू की आवाजाही ने ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है। भालू रात में गांव में घुसकर घरों के दरवाजे तोड़ रहा है और रसोई में रखा गुड़, शक्कर व तेल खा-पी रहा है। शाम होते ही ग्रामीण घरों में रहने को मजबूर हैं। कई लोग छतों पर पहरा दे रहे हैं। सबसे ज्यादा असर स्कूली बच्चों पर पड़ा है। गांव से करीब दो किलोमीटर दूर अमलीडीह स्कूल जाने वाले बच्चों की सुरक्षा के लिए वन विभाग ने तीन कर्मचारियों की ड्यूटी लगा दी है, जो उन्हें सुबह स्कूल छोड़ते और शाम को वापस गांव लाते हैं।

रात 9 से 12 बजे के बीच गांव में पहुंच रहा भालू

ग्रामीणों के मुताबिक भालू रोज रात करीब 9 से 12 बजे के बीच गांव में पहुंच रहा है। वह घरों के आसपास घूमने के बाद कमजोर दरवाजों को धक्का देकर अंदर घुस जाता है। तुलसी राम के घर का दरवाजा तोड़कर उसने करीब दो किलो शक्कर खा ली और डिब्बे में रखा सरसों तेल पी गया। सुंदर लाल के घर में भी घुसकर गुड़ और तेल खाया। बालोद निवासी पवन टुवानी के दैहान स्थित फॉर्म हाउस में भी भालू के घुसने की जानकारी है। ग्रामीणों ने भालू के वीडियो भी बनाए हैं।

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जंगल के रास्ते स्कूल जाते हैं डेढ़ दर्जन बच्चे

दैहान में हाईस्कूल नहीं होने के कारण करीब डेढ़ दर्जन बच्चे साइकिल से दो किलोमीटर दूर अमलीडीह पढऩे जाते हैं। रास्ता जंगल और सुनसान पगडंडियों से होकर गुजरता है। भालू की लगातार मौजूदगी के कारण अभिभावक बच्चों को अकेले भेजने से डर रहे हैं। वन विभाग के बीरबल यादव, अभय देशमुख और ढाल सिंह देशमुख को बच्चों की सुरक्षा के लिए लगाया गया है। तीनों सुबह बच्चों को स्कूल तक पहुंचाते हैं और शाम को छुट्टी के बाद उन्हें गांव वापस लाते हैं।

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शाम होते ही घरों में कैद हो रहे ग्रामीण

ग्रामीण तुलसी राम और शेर सिंह ने बताया कि शाम करीब छह बजे के बाद लोग घरों से बाहर निकलने से बच रहे हैं। मवेशियों को भी सुरक्षित स्थान पर बांधा जा रहा है। कुछ युवा छतों पर रहकर टॉर्च से निगरानी करते हैं। ग्रामीणों के अनुसार भालू दिन में जंगल में रहता है और रात में भोजन की तलाश में गांव की ओर आता है। वन विभाग के अनुसार जंगल में भोजन की उपलब्धता कम होने के कारण भालू रिहायशी क्षेत्र में पहुंच रहा है। उसे पकडऩे के लिए तीन स्थानों पर पिंजरे लगाए गए हैं। इनमें गुड़ और फल रखे गए हैं, लेकिन अब तक भालू पिंजरे में नहीं आया है। वन अमला रात में गश्त भी कर रहा है।

जल्द पकड़ने की कोशिश

वन परिक्षेत्र अधिकारी सरोज कुमार सिदार ने कहा कि दैहान में भालू के घरों में घुसने की जानकारी मिली है। उसे पकडऩे के लिए तीन स्थानों पर पिंजरे लगाए गए हैं। स्कूली बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए तीन वन कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई है। भालू को जल्द पकड़ने के प्रयास किए जा रहे हैं।