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नागौर में पशुपालन विभाग की जमीनों पर भूमाफिया का अवैध कब्जा

जिला मुख्यालय के रामदेव पशु मेला मैदान सहित मेड़ता सिटी के पशु मेला की जमीन पर काबिज हो रहे भूमाफिया, पशुपालन विभाग और राजस्व विभाग की उदासीनता से जिले में छह स्थानों पर अवैध कब्जे

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Jun 22, 2026
मेला मैदान पर अतिक्रमण के चलते अधूरा पड़ा चार दीवारी का काम
मेला मैदान पर अतिक्रमण के चलते अधूरा पड़ा चार दीवारी का काम

नागौर. जिले में पशुपालन विभाग की करोड़ों रुपए की जमीनें भूमाफियाओं के निशाने पर हैं। जिला मुख्यालय स्थित रामदेव पशु मेला मैदान से लेकर मेड़ता सिटी के पशु मेला मैदान तक विभागीय भूमि पर अवैध कब्जों के मामले सामने आए हैं। पशुपालन और राजस्व विभाग की उदासीनता के कारण अतिक्रमणकारियों के हौसले बुलंद हैं।

विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली की ओर से पूछे गए एक तारांकित प्रश्न के जवाब में सरकार ने स्वीकार किया है कि नागौर जिले में पशुपालन विभाग की भूमि पर अवैध कब्जों के छह मामले हैं। सरकार के पशुपालन विभाग ने यह भी माना है कि विभागीय भूमि पर अतिक्रमण हटाने के लिए प्रशासन के सहयोग से नियमानुसार कार्रवाई की जाती है, लेकिन जमीनी हकीकत में अधिकांश मामलों में कब्जे बरकरार हैं।

जानिए, कहां-कहां है अतिक्रमण

सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार नागौर शहर के रामदेव पशु मेला मैदान की भूमि पर करीब 7 बीघा में अतिक्रमण है। मेला मैदान से जुड़ी भूमि के एक हिस्से को लेकर विवाद न्यायालय तक पहुंच चुका है। इसके अलावा मानासर स्थित पशु नस्ल सुधार केंद्र की भूमि पर भी आंशिक अतिक्रमण दर्ज किया गया है।

मेड़ता सिटी में बलदेव पशु मेला मैदान की कई खसरों में दर्ज भूमि पर अतिक्रमण चिह्नित किया गया है। नागड़ी क्षेत्र में पशु चिकित्सा उपकेंद्र के लिए आवंटित भूमि पर अवैध निर्माण कर कब्जा किए जाने का मामला भी रिकॉर्ड में दर्ज है। इतना ही नहीं, भेड़ एवं ऊन विभाग की हरसौर स्थित भूमि तथा नाहरसिंहपुरा क्षेत्र में चारागाह विकास परियोजना की भूमि पर भी अतिक्रमण की शिकायतें दर्ज हैं। दस्तावेजों के अनुसार इन दोनों स्थानों पर भी विभाग की जमीन के कई हिस्सों पर कब्जा किया गया है।

समय पर नहीं चेते तो हाथ से निकल जाएगी जमीन

जानकारों का कहना है कि यदि समय रहते इन अतिक्रमणों को नहीं हटाया गया तो पशुपालन विभाग की सार्वजनिक उपयोग की भूमि धीरे-धीरे सिकुड़ जाएगी। पशु मेलों, पशु चिकित्सा सेवाओं और चारागाह विकास जैसी योजनाओं पर इसका सीधा असर पड़ सकता है। जब सरकार स्वयं छह स्थानों पर अतिक्रमण स्वीकार कर चुकी है, तो फिर इन भूमाफियाओं के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई कब होगी? जिले के पशुपालक और आमजन को प्रशासन की कार्रवाई का इंतजार हैं।

Published on:
22 Jun 2026 10:50 am