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प्रदेश में आरजीएचएस योजना पर संकट के बादल, नागौर में 68 लाख से ज्यादा बकाया

ढाई अरब से ज्यादा बकाया केवल निजी अस्पतालों का, दवा केन्द्रों का अलग, लम्बे समय से भुगतान नहीं मिलने पर बड़े ऑपरेशन करने से मना करने लगे निजी अस्पताल

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RGHS Scheme in Rajasthan

RGHS Scheme in Rajasthan (Patrika Photo)

नागौर. राजस्थान सरकार की महत्वाकांक्षी राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम (आरजीएचएस) इन दिनों गंभीर वित्तीय संकट से जूझती नजर आ रही है। योजना से जुड़े निजी अस्पतालों और दवा केन्द्रों का बकाया लगातार बढ़ता जा रहा है, जिसके चलते चिकित्सा सेवाओं पर असर पडऩे लगा है। प्रदेशभर में पिछले एक साल में निजी अस्पतालों का बकाया 2 अरब 60 करोड़ रुपए से अधिक पहुंच चुका है, जबकि दवा केन्द्रों और सहकारी उपभोक्ता होलसेल भंडार की दुकानों का अलग से करोड़ों रुपए भुगतान पिछले करीब सात-आठ महीने से अटका हुआ है।

जानकारी के अनुसार कई निजी अस्पतालों को भुगतान समय पर नहीं मिल रहा है। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग ने विधानसभा में लगाए गए एक प्रश्न का जवाब देते हुए 13 अप्रेल 2026 तक के बकाया की जानकारी दी, जिसमें पिछले एक साल का बकाया ढाई अरब से ज्यादा बताया गया है। ऐसे में अस्पताल संचालकों के सामने कर्मचारियों का वेतन, चिकित्सा उपकरणों का रखरखाव और दवाइयों की खरीद जैसी व्यवस्थाएं प्रभावित होने लगी हैं। हालात यह हैं कि कुछ बड़े निजी अस्पतालों ने आरजीएचएस के तहत महंगे ऑपरेशन और जटिल उपचार करने में अनिच्छा जतानी शुरू कर दी है। अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि लगातार बढ़ते बकाये के कारण आर्थिक दबाव बढ़ रहा है और सेवाओं को पूर्ववत जारी रखना मुश्किल होता जा रहा है।

स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े जानकारों का मानना है कि यदि सरकार जल्द बकाया भुगतान नहीं करती है तो स्थिति और गंभीर हो सकती है। निजी अस्पतालों एवं दवा प्रदाताओं का कहना है कि वे योजना से जुड़े रहना चाहते हैं, लेकिन लंबे समय तक भुगतान अटकने की स्थिति में सेवाओं को सुचारू रूप से जारी रखना कठिन होगा।

आरजीएचएस में होने लगा उपचार

नागौर के एक निजी अस्पताल संचालक ने बताया कि आरजीएचएस में न तो समय पर भुगतान होता है और न ही पूरे पैसे मिलते हैं। जिस केस या ऑपरेशन में 10 हजार का खर्च आता है, उसके सरकार 3 हजार रुपए देती है, इसलिए ज्यादातर मामलों में अनुबंधित अस्पताल मना कर देते हैं। एक बड़ी समस्या यह है कि केस रिजेक्ट बिना किसी जांच के किए जा रहे हैं। यदि केस सही है तो भी कोई न कोई बहाना बनाकर रिजेक्ट कर दिया जाता है। इसके परिणामस्वरूप आरजीएचएस में उपचार कम होने लगा है।

दवा केन्द्रों पर भी संकट

दूसरी ओर योजना से जुड़े दवा केन्द्रों पर भी संकट गहराता जा रहा है। समय पर भुगतान नहीं मिलने के कारण कई केन्द्रों पर कैशलेस सुविधा के तहत मिलने वाली दवाइयों की उपलब्धता प्रभावित हुई है। मरीजों को या तो दवाइयां नहीं मिल रही हैं या फिर उन्हें बाजार से स्वयं खरीदनी पड़ रही हैं। इसी तरह उपभोक्ता होलसेल भंडार की दुकानों का भी नवम्बर 2025 के बाद भुगतान नहीं किया गया है।

लाखों लाभार्थी हो रहे प्रभावित

आरजीएचएस योजना का लाभ प्रदेश के लाखों सरकारी कर्मचारियों, सेवानिवृत्त कार्मिकों और उनके आश्रितों को मिलता है। ऐसे में चिकित्सा सेवाओं में आ रही बाधाएं सीधे तौर पर लाभार्थियों को प्रभावित कर रही हैं। कई मरीजों ने शिकायत की है कि अस्पतालों और दवा केन्द्रों पर पहले जैसी सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं, जिससे उपचार में परेशानी हो रही है। उनका कहना है कि योजना का उद्देश्य सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना है, लेकिन यदि अस्पताल और दवा केन्द्र ही आर्थिक संकट में आ गए तो योजना की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े हो जाएंगे।

आठ महीने का भुगतान बाकी

जिले की उपभोक्ता भंडार की दवा दुकानों का पिछले आठ महीने का भुगतान बकाया चल रहा है, जिससे दवा दुकान संचालकों को आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है।

- सरोज चौधरी, अध्यक्ष, द नागौर सहकारी, उपभोक्ता होलसेल भंडार, नागौर