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नागौर जेएलएन अस्पताल में घुटना व कूल्हा प्रत्यारोपण के ऑपरेशन बंद

एनेस्थीसिया विभागाध्यक्ष ने 10 दिन पहले जारी किए आदेश, पीएमओ बोले - मेरे पास बजट नहीं, मरीजों को हो रही परेशानी, जिम्मेदार नहीं ले रहे सुध

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JLN hospital

JLN hospital Nagaur

नागौर. जिला मुख्यालय के पंडित जेएलएन राजकीय जिला अस्पताल में पिछले 7 दिन से टोटल नी रिप्लेसमेंट (घुटना) और टोटल हिप रिप्लेसमेंट (कूल्हा) के ऑपरेशन बंद करवा दिए गए हैं। इसके आदेश नागौर मेडिकल कॉलेज के अतिरिक्त प्रधानाचार्य एवं निश्चेतना विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. संदीप चौधरी ने गत छह जून को जारी किए। आदेश में उन्होंने मॉड्यूलर ओटी या उच्च स्तर का ऑपरेशन थियेटर (ओटी) नहीं होने तथा पर्याप्त एनेस्थीसिया उपकरण उपलब्ध नहीं होने का हवाला देते हुए टोटल नी रिप्लेसमेंट (टीकेआर) और टोटल हिप रिप्लेसमेंट (टीएचआर) के ऑपरेशन बंद कर दिए। इससे जिला अस्पताल में मरीजों को मिल रही सुविधा बंद हो गई है, जिससे गंभीर मरीजों को दूसरे जिलों का रुख करना पड़ रहा है। उधर, डॉ. चौधरी के आदेश को लेकर दस दिन बाद मंगलवार को जेएलएन अस्पताल के पीएमओ डॉ. आरके अग्रवाल ने एक कमेटी गठित कर रिपोर्ट मांगी है।

एक साल पहले भी कमेटी ने दी थी रिपोर्ट

निश्चेतना विभागाध्यक्ष डॉ. चौधरी ने 15 अप्रेल 2025 को पीएमओ को पत्र लिखकर जेएलएन अस्पताल में होने वाले टीकेआर और टीएचआर के ऑपरेशन को लेकर सवाल खड़े किए थे। उन्होंने सर्जरी के लिए मापदंड के अनुकूल थियेटर नहीं होने पर पीएमओ से मार्गदर्शन मांगा था, जिस पर पीएमओ डॉ. आरके अग्रवाल ने तीन डॉक्टरों व सीनियर नर्सिंग ऑफिसर की कमेटी बनाकर रिपोर्ट मांगी थी। कमेटी ने पॉजीटिव रिपोर्ट दी थी।

ऑपरेशन बंद करने के पीछे डॉ. चौधरी के तर्क

जेएलएन अस्पताल के निश्चेतना विभागाध्यक्ष डॉ. संदीप चौधरी का कहना है कि ओटी में पर्याप्त उपकरण एवं सामान उपलब्ध कराने को लेकर वे पिछले दस महीने से पीएमओ को पत्र लिख रहे हैं, लेकिन अब तक उन्हें कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला है। उनका कहना है कि ओटी में लम्बे समय से डिफिब्रिलेटर व ईटी सीओटू मॉनिटर तक नहीं है। ऑपरेशन के दौरान काम आने वाले कपड़े, गाउन, शीट, औजार, ओटो क्लेव ड्रम आदि नहीं हैं, जिनकी लम्बे समय से मांग की जा रही है। यहां तक कि ओटी के लिए स्वीपर तक नहीं है। उनका कहना है कि हाल ही अन्य जिलों के अस्पतालों में हुई मौतों के बाद यह निर्णय लेना पड़ा।

डॉक्टर का तर्क - अब तक 200 से अधिक लोगों के ऑपरेशन

अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि पिछले तीन-चार साल में टीकेआर और टीएचआर के 200 से अधिक ऑपरेशन करके मरीजों को सरकारी योजना का लाभ पहुंचाया जा चुका है। अस्पताल के हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. हितेश रुलानिया का कहना है कि जिले के सैकड़ों मरीजों के न केवल मां योजना में नि:शुल्क टीकेआर और टीएचआर के ऑपरेशन किए गए, बल्कि इससे अस्पताल को भी लाखों रुपए की आय हुई है। अन्य जिलों में भी इन्हीं परिस्थितियों में ऑपरेशन किए जा रहे हैं। ऑपरेशन के दौरान हम पूरा ध्यान रखते हैं।

पीएमओ बोले - जितना संभव है, उतना दे रहे

इस संबंध में पीएमओ डॉ. अग्रवाल का कहना है कि पूरे राजस्थान में यही स्थिति है, पहले भी तो ऑपरेशन हो रहे थे, इसलिए यह कहना गलत है कि ओटी में कोई सामान नहीं है। ओटी का सब सामान लगातार दिया जा रहा है, रिकॉर्ड देखेंगे तो पता चल जाएगा। हम जितना उपलब्ध करवा सकते हैं, उतना दे रहे हैं। वो जितनी डिमांड कर रहे हैं, उसके लिए हमारे पास आरएमआरएस में पैसा ही नहीं है, ऐसे वो सारी चीजें कैसे लाकर दें। उन्होंने ऑपरेशन क्यों बंद करवाए, यह तो वही जानें।

पत्रिका व्यू... जेएलएन अस्पताल में आखिर कब सुधरेगी व्यवस्थाएं

जिला मुख्यालय के जेएलएन अस्पताल में पिछले करीब छह महीने से चिकित्सा व्यवस्थाएं चरमराई हुई हैं। कहने को जिला अस्पताल है, लेकिन हालात एक रेफरल अस्पताल की बन चुकी है। सीटी स्केन और सोनोग्राफी जांच लम्बे समय से बंद है। एक एक्स-रे मशीन भी बंद पड़ी है। अस्पताल में मरीजों का उपचार करने के लिए कई उपकरण और सामान उपलब्ध नहीं हो रहा है। निश्चेतना विभागाध्यक्ष डॉ. चौधरी मॉड्यूलर ओटी की बात कर रहे हैं, जो जेएलएन के नए भवन में ही संभव है और उसे चालू होने में अभी छह महीने का समय और लगेगा। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि क्या तब तक मरीज परेशान होते रहेंगे। या फिर आवश्यक संसाधन जुटाकर एक बार फिर टीकेआर और टीएचआर के ऑपरेशन शुरू होंगे?