
नागौर के सियोलों की ढाणी की प्राथमिक स्कूल
नागौर. मानसून की दस्तक के साथ सरकारी स्कूलों की जर्जर इमारतें एक बार फिर लाखों विद्यार्थियों की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर रही हैं। पिछले वर्ष झालावाड़ में स्कूल भवन हादसे के बाद सरकार ने पूरे प्रदेश में विद्यालय भवनों का सर्वे कराया था, लेकिन सर्वे के बाद भी हालात में अपेक्षित सुधार नहीं हो पाया है। विधानसभा में सरकार की ओर से दिए गए जवाब से सामने आया है कि प्रदेश के 45 हजार से अधिक सरकारी विद्यालय भवनों को वृहद मरम्मत की जरूरत है, जबकि स्वीकृति मात्र 4187 विद्यालयों को ही मिल सकी है। यानी करीब 91 प्रतिशत विद्यालय भवन आज भी मरम्मत की बाट जोह रहे हैं।
3768 विद्यालय भवन जर्जर, स्वीकृति 123 को
सर्वे में प्रदेश के 3768 विद्यालय भवन पूरी तरह जर्जर पाए गए थे। इनमें से 2558 भवनों को आधिकारिक रूप से जर्जर घोषित किया गया, लेकिन अब तक केवल 1129 भवनों को ही जमींदोज किया जा सका है। इससे भी अधिक चिंताजनक तथ्य यह है कि जर्जर घोषित भवनों के स्थान पर नए भवन निर्माण की रफ्तार बेहद धीमी है। शिक्षा विभाग ने 2248 विद्यालयों के नए भवनों के प्रस्ताव भेजे, लेकिन स्वीकृति केवल 123 विद्यालयों को ही मिली है।
2,19,902 कक्षों को वृहद मरम्मत की आवश्यकता
प्रदेश में कुल 63,308 सरकारी विद्यालय हैं। इनमें 5.40 लाख से अधिक कक्ष अवस्थित हैं। सर्वे के अनुसार 83,783 कक्ष पूर्णतया जर्जर हैं, जबकि 2,19,902 कक्षों को वृहद मरम्मत की आवश्यकता है। इसके बावजूद मरम्मत कार्य सीमित दायरे में ही सिमटा हुआ है।
बारिश में छत से टपकता है पानी
विधानसभा में सरकार ने स्वीकार किया है कि कई भवनों के जर्जर होने के पीछे पानी का रिसाव प्रमुख कारण है। बावजूद इसके विद्यालय भवनों की छतों की नियमित वाटरप्रूफिंग के लिए कोई स्थायी बजट व्यवस्था नहीं है। विभाग का कहना है कि केवल वृहद मरम्मत की स्वीकृति मिलने पर ही वाटरप्रूफिंग कार्य कराया जाता है।
बड़ा सवाल : खतरे की पहचान हो चुकी तो मरम्मत क्यों नहीं
विशेषज्ञों का मानना है कि मानसून के दौरान जर्जर भवनों में पढ़ाई करवाना जोखिम भरा साबित हो सकता है। ऐसे में सवाल यह है कि जब सर्वे के जरिए खतरे की पहचान हो चुकी है, तब भी हजारों विद्यालयों में सुधार कार्य अधर में क्यों हैं? बारिश का मौसम शुरू हो चुका है और यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो किसी भी हादसे की जिम्मेदारी तय करना मुश्किल होगा।
फैक्ट फाइल
- प्रदेश में कुल सरकारी विद्यालय : 63,308
- जर्जर विद्यालय भवन : 3,768
- जर्जर घोषित भवन : 2,558
- जमींदोज किए गए भवन : 1,129
- नए भवनों को स्वीकृति : 123
- कुल कक्ष : 5,40,126
- पूर्णतया जर्जर कक्ष : 83,783
- वृहद मरम्मत योग्य कक्ष : 2,19,902
- मरम्मत आवश्यक विद्यालय : 45,365
- मरम्मत स्वीकृत विद्यालय : 4,187
- मरम्मत का इंतजार कर रहे विद्यालय : 41,178
सरकार की मंशा पर सवाल
पिछले साल झालावाड़ जिले में हुए हादसे के बाद दबाव बना तो सरकार ने सर्वे करवा लिया, जिसमें जर्जर भवनों व मरम्मत योग्य विद्यालय भवनों की पहचान भी हो गई, लेकिन बजट स्वीकृति 10 फीसदी की भी नहीं दी गई। इससे सरकार की मंशा पर सवाल खड़े होते हैं। क्योंकि मानसून में किसी विद्यालय में फिर कोई दुर्घटना होती है तो उसकी जिम्मेदारी किसकी होगी। क्या इस बार भी शिक्षकों को जिम्मेदार ठहराया जाएगा।
- अर्जुनराम लोमरोड़, जिलाध्यक्ष, शिक्षक संघ शेखावत, नागौर
Published on:
16 Jun 2026 01:04 pm
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