Personal Finance

हायर पेंशन मामले में सुप्रीम कोर्ट की बात ना मानने वाले अधिकारियों के खिलाफ होगी कार्रवार्इ

EPFO रीजनल ऑफिस यह बहाना बना रहे हैं कि इस मामले में हेड ऑफिस से क्‍लैरिफिकेशन और गाइडलाइंस के लिए लिखा गया और हेड ऑफिस से अब तक कोर्इ जवाब नहीं आया है।
2 min read
Jun 09, 2018
Supreme court
हायर पेंशन मामले में सुप्रीम कोर्ट की बात ना मानने वाले अधिकारियों के खिलाफ होगी कार्रवार्इ

नई दिल्‍ली। अब कर्मचारी भविष्‍य निधि संगठन के जो अधिकारी हायर पेंशन को लेकर सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन नहीं करेंगे उनके खिलाफ कार्रवार्इ की जाएगी। र्इपीएफअो के आलाधिकारियों के अनुसार जो अधिकारी हायर पेंशन के लिए योग्‍य मामलों के सेटलमेंट में देरी कर रहे हैं या हायर पेंशन देने से इनकार कर रहे हैं तो उन रीजनल पीएफ कमिश्‍नर या रीजन का इन्‍चार्ज को जिम्‍मेदार माना जाएगा।

बना रहे हैं बहाना
जानकारों की मानें तो रीजनल ऑफिस यह बहाना बना रहे हैं कि इस मामले में हेड ऑफिस से क्‍लैरिफिकेशन और गाइडलाइंस के लिए लिखा गया और हेड ऑफिस से अब तक कोर्इ जवाब नहीं आया है। जबकि ईपीएफओ के 16 ऑफिस ने 3570 पेंशनर्स की पेंशन रिवाइज करते हुए हायर पेंशन का एरियर भी दे दिया है।

देना होगा 7 दिनों में जवाब
र्इपीएफअो के एडिशनल सेंट्रल पीएफ कमिश्‍नर आरएम वर्मा ने सभी रीजनल पीएफ कमिश्‍नर्स (रीजन इन्‍चार्ज) को हाल में पत्र लिख कर कहा है कि हायर पेंशन के मामलों में नॉन सेटलमेंट के मामले बढ़ रहे हैं। अगर कोई व्‍यक्ति हायर पेंशन के लिए आवेदन करता है और उसका आवेदन सुप्रीम कोर्ट के आदेश के तहत पेंशन की समीक्षा के योग्‍य नहीं पाया जाता है तो उस व्‍यक्ति को आवेदन मिलने के 7 दिन के अंदर यह जानकारी दी जानी चाहिए।

क्या है सुप्रीम कोर्ट का आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने 2 016 के अपने एक आदेश में कहा है कि ईपीएफओ को पीएफ मेंबर्स को पेंशन फंड में पूरी सैलरी पर कंट्रीब्‍यूशन का ऑप्‍शन देना होगा। इसका मतलब है कि जिन लोगों ने 1 सितंबर, 2014 से पहले नौकरी ज्‍वाइन की है वे अपनी पूरी सैलरी पर पेंशन फंड में कंट्रीब्‍यूट कर सकते हैं। वे इसके लिए अपनी कंपनी और ईपीएफओ के पास आवेदन कर सकते हैं।

इन लोगों को नहीं मिलेगी ज्यादा पेंशन
अगर किसी ने सितंबर 2014 के बाद प्राइवेट सेक्टर में नौकरी ज्वॉइन की है तो पेंशन फंड में ज्‍यादा कंट्रीब्यूशन का ऑप्शन आपके लिए नहीं है। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (र्इपीएफअो) ने सितंबर 2014 में वेज लिमिट 15,000 रुपए तय की थी। आपकी कंपनी 15,000 रुपए का 12 फीसदी ही पीएफ में कंट्रीब्यूट कर सकती है। इसका 8.33 फीसदी यानी 1250 रुपए ही आपके पेंशन फंड में जाता है। कंपनी के कंट्रीब्यूशन का बाकी पैसा इम्प्लाइज प्रॉविडेंट फंड में जाता है।

Published on:
09 Jun 2018 10:59 am