रिजर्व बैंक ने टीएलटीआरओ के तहत छोड़े थे 25 हजार करोड़ रुपए टीएलटीआरओ के तहत 12,800 करोड़ रुपए की राशि का हुआ आवेदन लिक्विडिटी बढ़ाने को आरबीआई ने बैंकों के के पास छोड़े 7 लाख करोड़
नई दिल्ली। नॉन बैंकिंग फाइनेंस कंपनीज ( NBFC ) को बैंकों ने बड़ा झटका दिया है। बैंकों ने भारतीय रिजर्व बैंक ( reserve bank of india ) के सिर्फ 25 हजार करोड़ रुपए में से सिर्फ आधी रकम के लिए आवेदन किया है। जबकि रिजर्व बैंक लंबी अवधि बांड मार्केट ( Bond Market ) को सुधारने की कोशिश कर रही है। आपको बता दें कि रिजर्व बैंक ने गुरुवार को कहा था कि वह कम समय वाले ट्रेजरी बिल की सेल करेगा। जबकि लंबे समय वाले सरकारी बांड की खरीदारी करने का ऐलान किया था।
TLTRO का किया था ऐलान
जानकारी के अनुसार एनबीएफसी को नुकसान से बचाने और मदद करने के लिए रिजर्व बैंक की ओर से विषेश सुविधा शुरू की गई थी। रिजर्व बैंक ने एनबीएफसी को कोरोना वायरस लॉकडाउन के चलते तीन महीने का मोरेटोरियम भी दिया था। जिसकी वजह से कारोबार में काफी नुकसान देखने को मिला। इसे टार्गेटेड लॉन्ग टर्म रेपो ऑपरेशन का दिया गया था, जिसे टीएलटीआरओ भी कहते हैं। इस योजना के अनुसार आरबीआई लंबे समय के रेपो के माध्यतम से तीन साल तक के 50,000 करोड़ रुपए का किफायती फंड पेश करेगी। इस फंड के लिए सिर्फ बैंक ही आवेदन कर सकते हैं और एनबीएफसी को राहत दे सकते हैं।
सिर्फ आधी रकम का ही आवेदन
जानकारी के अनुसार गुरुवार तक टीएलटीआरओ के तहत बैंकों की ओर से 25,000 करोड़ रुपए में से सिर्फ 12,800 करोड़ रुपए तक का ही आवेदन किया है। आपको बता दें कि कोरोना वायरस के कारण पैदा हुए आर्थिक संकट को दूर करने के लिए रिजर्व बैंक ने बैंकों के पास 7 लाख करोड़ रुपए का एक्सट्रा फंड रखा है। जानकारों की मानें तो टीएलटीआरओ के लिए आवेदन ना करने वालों ने साफ संकेत दिया है कि कर्ज से जुड़े जोखिम के प्रति पूरी तरह से सचेत है।