
सिक्किम के पात्र निवासियों को इनकम टैक्स से छूट मिलती है। (PC: AI)
Income Tax Free state: भारत में करोड़ों टैक्सपेयर्स इस समय अपना आयकर रिटर्न भरने की तैयारी कर रहे हैं। एक्सपर्ट कहते हैं कि आईटीआर भरने के कभी भी आखिरी डेट का इंतजार नहीं करना चाहिए। हो सकता है उस समय आपको टाइम न मिले या पोर्टल पर टेक्निकल ग्लिच आ जाए। लेकिन क्या आप जानते हैं कि भारत में एक जगह ऐसी भी है, जहां लोगों को इनकम टैक्स नहीं भरना होता। भारत के इस राज्य में लोगों की पूरी कमाई उनके पास ही रहती है, सरकार के पास कुछ नहीं जाता। यह राज्य सिक्किम है।
हालांकि, अक्सर लोग यह मान लेते हैं कि अगर वे सिक्किम में जाकर बस जाएं तो उन्हें भी टैक्स से छुटकारा मिल जाएगा। हकीकत इससे बिल्कुल अलग है। केवल सिक्किम में रहने भर से कोई व्यक्ति टैक्स फ्री नहीं हो जाता।
इस कहानी की शुरुआत 1975 से होती है। उसी साल सिक्किम भारत का 22वां राज्य बना था। उससे पहले सिक्किम एक स्वतंत्र राजशाही थी, जहां उसके अलग कानून और टैक्स व्यवस्था लागू थी। जब सिक्किम का भारत में विलय हुआ, तब केंद्र सरकार ने वहां के लोगों के कुछ पुराने अधिकारों और कानूनी व्यवस्थाओं को बरकरार रखने का वादा किया। बाद में इन प्रावधानों को संविधान के अनुच्छेद 371(F) के जरिए संरक्षण दिया गया। इसी वादे को निभाने के लिए आयकर कानून में धारा 10(26AAA) जोड़ी गई, जिसके तहत पात्र सिक्किमी नागरिकों को विशेष टैक्स छूट दी गई।
आयकर अधिनियम की धारा 10(26AAA) के अनुसार, पात्र सिक्किमी व्यक्तियों को राज्य में अर्जित आय पर इनकम टैक्स से छूट मिलती है। कुछ शर्तों के तहत डिविडेंड और प्रतिभूतियों से मिलने वाली ब्याज आय भी इस छूट के दायरे में आती है। यानी जिन लोगों को कानून के अनुसार सिक्किमी माना गया है, उन्हें इस प्रावधान के तहत टैक्स नहीं देना पड़ता।
यह छूट सिक्किम में रहने वाले हर व्यक्ति को नहीं मिलती। इसका लाभ केवल उन लोगों को मिलता है जिन्हें कानून के तहत "सिक्किमी" माना गया है। इसमें वे लोग शामिल हैं, जिनके नाम 26 अप्रैल 1975 से पहले सिक्किम सब्जेक्ट्स रजिस्टर में दर्ज थे। इसके अलावा उनके वंशज भी इस दायरे में आते हैं। यानी यह सुविधा निवास के आधार पर नहीं, बल्कि ऐतिहासिक और कानूनी पहचान के आधार पर दी जाती है।
यही वह सवाल है, जो सबसे ज्यादा पूछा जाता है। मान लीजिए दिल्ली का कोई सॉफ्टवेयर इंजीनियर, मुंबई का कोई बैंकर या बेंगलुरु का कोई प्रोफेशनल नौकरी के लिए सिक्किम चला जाता है। वह वहां घर खरीद लेता है और कई साल तक रहता भी है। इसके बावजूद उसे सामान्य आयकर नियमों के तहत टैक्स देना होगा। सिर्फ राज्य बदल लेने से कोई व्यक्ति इस विशेष छूट का हकदार नहीं बन जाता।
सिक्किम के पात्र लोगों के लिए यह प्रावधान आर्थिक रूप से काफी फायदेमंद है। इससे उनकी आय का बड़ा हिस्सा उनके पास ही रहता है, जिससे स्थानीय कारोबार, खर्च और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलता है। लेकिन इसका महत्व केवल आर्थिक नहीं है। यह उस ऐतिहासिक समझौते और संवैधानिक व्यवस्था की याद भी दिलाता है जिसके तहत सिक्किम भारत का हिस्सा बना था।
Published on:
10 Jun 2026 02:59 pm
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