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Bond SIP में निवेश करना चाहते हैं? जानिए नॉर्मल इक्विटी एसआईपी से कितनी है यह अलग

Equity SIP Vs Bond SIP: इक्विटी म्यूचुअल फंड में SIP की अपार सफलता के बाद अब सरकारी सिक्योरिटीज और कॉरपोरेट बॉन्ड्स में भी SIP का चलन बढ़ रहा है। हालांकि, बॉन्ड SIP शेयर बाजार की तरह 'रुपया कॉस्ट एवरेजिंग' का फायदा नहीं देती।
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भारत

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Pawan Jayaswal

Jul 25, 2026

Investment Tips

बॉन्ड में भी एसआईपी के जरिए निवेश किया जा सकता है। (PC: Pixabay)

Bond SIP Investment: भारत में करोड़ों लोग हर महीने SIP के जरिए शेयर बाजार में पैसा लगा रहे हैं। हर महीने अपने आप खाते से पैसा कट जाना और बाजार के उतार-चढ़ाव का फायदा मिलना, लोगों को काफी भा रहा है। इसी देखा-देखी अब कई फिनटेक प्लेटफॉर्म्स ने बॉन्ड, एफडी और सरकारी सिक्योरिटीज में भी SIP की सुविधा शुरू कर दी है। लेकिन बॉन्ड में SIP करने से पहले यह समझना बहुत जरूरी है कि यह इक्विटी फंड की SIP से बिल्कुल अलग है।

इक्विटी एसआईपी से अलग है बॉन्ड एसआईपी

शेयर बाजार तो उतार-चढ़ाव का समंदर है। वहां जब शेयर के दाम गिरते हैं, तो आपकी SIP में आपको ज्यादा यूनिट्स मिलती हैं और दाम बढ़ने पर कम। इसी को 'रुपया कॉस्ट एवरेजिंग' कहते हैं, जो लंबे समय में आपकी खरीद लागत घटा देती है। लेकिन बॉन्ड या फिक्स्ड इनकम के मामले में ऐसा नहीं होता। अच्छे कॉरपोरेट बॉन्ड और सरकारी सिक्योरिटीज की कीमतों में ज्यादा उतार-चढ़ाव नहीं होता। इनकी कीमतें तो लगभग स्थिर ही रहती हैं। फिर बॉन्ड SIP का असली खेल क्या है?

ब्याज दरों का होता है एवरेज

बॉन्ड SIP असल में कीमतों का नहीं, बल्कि 'ब्याज दरों' का औसतीकरण (Yield-Laddering) करती है। जब आप हर महीने बॉन्ड में SIP करते हैं, तो आप उस समय बाजार में चल रही ब्याज दर को लॉक कर लेते हैं। अगर आने वाले समय में ब्याज दरें गिरती हैं, तो आपकी पुरानी किस्तें आपको ज्यादा ब्याज देती रहेंगी। अगर दरें बढ़ती हैं, तो आपकी नई किस्तें ज्यादा रिटर्न का फायदा उठाएंगी। यानी आपको सही समय का अंदाजा लगाने की सिरदर्दी नहीं पालनी पड़ती।

कैसे काम करती है बॉन्ड SIP?

सलेक्शन: आप बॉन्ड की रेटिंग, मैच्योरिटी अवधि और यील्ड के आधार पर इन्वेस्टमेंट थीम चुनते हैं।
ऑटोमेशन का फायदा: आपको एक बार UPI या e-NACH मेंडेट के जरिए मंथली इंस्टॉलमेंट और डेबिट डेट तय करनी होती है, इसके बाद हर महीने पैसा अपने आप कट जाएगा।
अलॉटमेंट एंड कैश फ्लो: हर महीने आपकी पसंद का बॉन्ड आपके डीमैट अकाउंट में आ जाता है और उसका ब्याज सीधे आपके बैंक खाते में जमा होता रहता है।
फ्लेक्सिबिलिटी: आप जब चाहे SIP रोक सकते हैं। लेकिन हां, जो बॉन्ड आप पहले ही खरीद चुके हैं, उन्हें या तो मैच्योरिटी तक रखना होगा या सेकेंडरी मार्केट में बेचना होगा।

निवेश करने से पहले इन दो बातों का रखें खास ध्यान

लालच में न पड़ें

अगर कोई BBB+ रेटिंग वाला बॉन्ड आपको 12% ब्याज दे रहा है, तो समझ लीजिए कि वहां जोखिम (Credit Risk) भी ज्यादा है। AAA रेटिंग वाले 8% ब्याज देने वाले सुरक्षित बॉन्ड के मुकाबले ऐसे बॉन्ड्स में कंपनी के डूबने का खतरा ज्यादा रहता है। SIP करने से जोखिम कम नहीं होता, सिर्फ आपकी खरीद का समय बंट जाता है।

लिक्विडिटी

भारत में कॉरपोरेट बॉन्ड का सेकेंडरी मार्केट अभी उतना बड़ा नहीं है। अगर आपको मैच्योरिटी से पहले पैसा निकालना पड़े, तो हो सकता है आपको बॉन्ड घाटे में बेचना पड़े। इसलिए बॉन्ड SIP में वही पैसा लगाएं जिसे आप मैच्योरिटी तक छोड़ सकते हों।

(डिस्क्लेमर: यह आर्टिकल सिर्फ जानकारी मात्र है। यह निवेश की सलाह नहीं है। कहीं भी पैसा लगाने से पहले अपने निवेश सलाहकार से परामर्श लें।)