बैंक ऑफ अमेरिका सिक्योरिटीज के विशेषज्ञों का मानना है कि अगर सरकार समय रहते मुफीद कदम नहीं उठाती है तो वर्तमान चक्रीय सुस्ती ( Cyclical Slowdown ) संरचनात्मक संकट में बदल सकती है।जिसका बाजा़र पर नकारात्मक असर पड़ना तय है।
नई दिल्ली। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ( FM Nirmala Sitharaman ) 1 फरवरी को 2020-21 का बजट पेश करेंगी। इस दौरान वित्त मंत्री पहले पूर्ण बजट में प्रोत्साहन पैकेज का ऐलान कर सकती है। बजट पेश होने से पहले हर सेक्टर के दिग्गज अपने क्षेत्र में होने वाली संभावित घोषणाओं पर चर्चा कर रहे हैं।
इसी बात को आधार बनाकर कई विशेषज्ञों का कहना है कि नरेंद्र मोदी सरकार कंज्यूमर डिमांड को बढ़ावा देने के लिए बजट में नई घोषणाएं कर सकती है। अमेरिकी ब्रोकरेज कंपनी ने भी अपनी एक रिपोर्ट में कहा कि सरकार की इस तरह की पहल से बाजार में सकारात्मक बदलाव देखने को मिलेंगे।
सुस्त पड़ी इकोनॉमी को सुधारने की कवायद जरूरी
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण शनिवार को अपना बजट प्रस्ताव पेश करेंगी। इस बजट पर सभी टकटकी लगाए बैठे हैं क्योंकि पिछले कुछ वक़्त से आर्थिक वृद्धि की रफ्तार घटी है। ऐसे में सभी ये देखना चाहेंगे कि आखिर सरकार सुस्त पड़ी आर्थिक वृद्धि दर को पटरी पर लाने के लिए किन नए उपायों की घोषणा करेंगे। देश की GDP Growth के चालू वित्त वर्ष में गिरकर पांच फीसद पर आने का अनुमान है।
इनकम टैक्स ( Income Tax ) में कटौती संभव
इस साल इनकम टैक्स में राहत मिलने की भी सबसे ज्यादा उम्मीद की जा रही है। एक अनुमान के मुताबिक इनकम टैक्स में छूट की लिमिट मौजूदा 2.5 लाख रुपए से बढ़ाकर 5 लाख या 7 लाख रुपए की जा सकती है। हालांकि एक कयास इस बात के भी लगाएं जा रहे है कि बजट का समय करीब आने के साथ टैक्स कलेक्शन के लक्ष्य से पिछड़ने की वजह से सरकार शायद छूट नहीं बढ़ाए।
लेकिन फिर भी सरकार टैक्स दरों में ऐसे बदलाव कर सकती है जिससे निम्न और मध्यम आय वालों को राहत मिल सकें। इन्हीं में से एक उपाय है 5 लाख से 10 लाख रुपए तक की आय पर टैक्स की दर 20% से घटाकर 10% करना। वहीं बाजार और लोगों की नजर ( Individual Income Tax ) और कंपनियों के लिए कर पर है।
मांग बढ़ाने वाले उपायों पर भी विचार संभव
बैंक ऑफ अमेरिकी ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा है, ''लंबी अवधि के लिए यह बेहद जरूरी है कि लोग खर्च करें। कम समय के लिए ही सही लेकिन डिमांड को बढ़ावा देने वाले उपाये भी जरूरी है। इससे चक्रीय सुस्ती को संरचनात्मक बनने से रोकने में मदद मिलेगी। जिससे गिरती आर्थिक ग्रोथ पर काबू पाया जा सकें।