
नर्इ दिल्ली। प्राइवेटाइजेशन के तरफ तेजी से बढ़ रही मोदी सरकार ने अब एक आैर सरकारी बैंक को प्राइवेट सेक्टर के हाथों बेचने की तैयारी में है। सरकार आर्इडीबीआर्इ बैंक की अपनी 51 फीसदी की हिस्सेदारी बेचने चाहती है। इससे जुड़े सूत्रों के मुताबिक, बीमा कंपनी एलआर्इसी आर्इडीबीआर्इ बैंक में 51 फीसदी हिस्सेदारी खरीदने की तैयारी में है। वर्तमान में आर्इडीबीआर्इ बैंक में सरकारी की 81 फीसदी हिस्सेदारी है वहीं एलआर्इसी के पास 11 फीसदी की हिस्सेदारी है। एेसे में यदि एलआर्इसी 51 फीसदी हिस्सेदारी खरीदने में कामयाब हो जाती है तो आर्इडीबीअार्इ बैंक में उसकी सबसे अधिक हिस्सेदारी हो जाएगी।
कानूनी पेंच को पार करना होगा
हालांकि इस डील को लेकर कुछ कानूनी पेंच भी है। दरअसल आर्इआरडीए की नियमाें के मुताबिक, कोर्इ भी बीमा कंपनी किसी भी दूसरी कंपनी में 15 फीसदी से अधिक कि हिस्सेदारी नहीं खरीद सकती है। इस नियम को ध्यान में रखते हुए एलआर्इसी ने इस डील काे लेकर आर्इआरडीए से कुछ छूट की मांग की है।
सबसे अधिक एनपीए वाले बैंकों में से एक है आर्इडीबीआर्इ बैंक
आपको बता दें कि आर्इडीबीअार्इ बैंक देश के उन बैंकाें में से एक है जिसका एनपीए (फंसा कर्ज) सबसे अधिक है। 21 मार्च 2018 तक इस बैंक का कुल एनपीए 28 फीसदी था आैर इसी वजह से इस बैंक की दिक्कतें बढ़ीं है। मौजूदा वित्त वर्ष आर्इडीबीआर्इ बैंक को 18 हजार करोड़ रुपए की पूंजी की जरूरत है। एेसे में सरकार के पास इसमें नए निवेशकों काे लाने के आलावा आैर कोर्इ दूसरा विकल्प नहीं है। सिर्फ आइडीबीआर्इ बैंक ही नहीं बल्कि देश के कर्इ बड़े बैंकों को एनपीए के बोझ से दो चार होना पड़ रहा है।