
नई दिल्ली। भारतीय रिजर्व बैंक ( reserve bank of india ) ने ऐसेट रीकंस्ट्रक्शन कंपनियों यानी ARC के रेगुलेशन के लिए 6 सदस्यीय कमेटी तैयार की है। जिसकी अध्यक्षता आरबीआई के पूर्व एग्जिक्यूटिव डायरेक्टर सुदर्शन सेन करेंगे। इस कमेटी का काम स्ट्रेस्ड लोन के निपटारे में एआरसी द्वारा निभाई जाने वाली भूमिका और उनके बिजनेस मॉडल को रिव्यू करना होगा। कमेटी अपनी पहली बैठक के बाद तीन महीने में अपनी रिपोर्ट आरबीआई को देगी। इस कमेटी का काम एआरसी पर लागू कानून और रेगुलेटरी फ्रेमवर्क की समीक्षा करना भी होगा। वहीं कमेटह एआरसी की क्षमता को बढ़ाने की सलाह देगी। साथ ही इन्सॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड के तहत स्ट्रेस्ड लोन के रेजोल्यूशन में उनकी भूमिका की समीक्षा भी करेगी।
कमेटी में शामिल होने वाले लोगों के नाम
इस कमेटी में सुदर्शन सेन के साथ आईसीआईसीआई बैंक के एग्जिक्यूटिव डायरेक्टर विशाखा मुले, एसबीआई के पूर्व डिप्टी मैनेजिंग डायरेक्टर पीएन प्रसाद, एमडीआई के इकोनॉमिक्स के प्रोफेसर रोहित प्रसाद, अरनेस्ट एंड येग के पार्टनर अबिजेर दीवानजी और चार्टर्ड अकाउंटेंट आर आनंद शामिल किए गए हैं।
बजट में हुई थी घोषणा
देश के बैंकिंग सिस्टम में फंसे कर्ज की समस्या कई सालों से देखने को मिल रही है। आरबीआई की ओर से इस मामले में एक रिपोर्ट भी जारी की थी। जिसे देखते हुए मोदी सरकार ने एनपीए की समस्या को खत्म करने और बैंकों के बोझ को करने के लिए बजट में प्राइवेट एसेट रिकंस्ट्रक्शन कंपनी का ऐलान किया था। आपको बता दें कि आरबीआई की रिपोर्ट के अनुसार सितंबर 2021 तक बैंकों का एनपीए सितंबर 2020 के 7.5 फीसदी से बढ़कर 13.5 फीसदी तक पहुंचने के आसार हैं।