भारतीय स्टेट बैंक यानी एसबीआई 6 अहम ब्रांच बंद करने जा रही है।
नई दिल्ली। बीते कुछ महीनों से देश के सरकारी बैंकों की हालत लगातार खस्ता होती जा रही है। एनपीए और विलफुल डिफॉल्टर्स की मार से पब्लिक सेक्टर बैंकों की हालत खराब होती जा रही है। पंजाब नेशनल बैंक हो या फिर भारत का सबसे बड़ा सरकारी बैंक सबकी डूबते लोन के आंकड़ें लगातार बढ़ती जा रही है। इसी मुसीबत से बचने के लिए अब भारतीय स्टेट बैंक यानी एसबीआई दुनिया के अलग अलग देश में चल रहे 6 अहम ब्रांच बंद करने जा रही है। बैंक की वित्तीय हालत को सुधारने के मद्देनजर एसबीआई ने ये फैसला किया है। एसबीआई 2019 तक इन 6 ब्रांच को बंद कर सकती है।
वित्त मंत्रालय ने जारी किए निर्देश
वित्त मंत्रालय की तरफ से इस बारे में निर्देश जारी कर दिए गए हैं। एसबीआई जिन 6 देशों में चल रहे ब्रांच को बंद कर रही है उनमें चीन, श्रीलंका, ओमान, सऊदी अरब, फ्रांस और बोस्टन शामिल है।
अन्य कारोबार को भी समेटने की योजना
बैंकिंग ब्रांच को बंद करने के साथ साथ एसबीआई आने वाले तीन सालों में अपने नॉन-कोर बिजनेस को भी समेटने का फैसला किया है। इस योजना के अनुसार चीन और सऊदी अरब की शाखा 30 सितंबर 2018 तक बंद किया जा सकता है। वहीं ओमान, पेरिस, श्रीलंका और बोस्टन की शाखा को मार्च 2019 तक बंद कर दिया जाएगा। इसके अलावा एसबीआई की 10 अन्य शाखाओं की अभी समीक्षा की जा रही है। जल्द ही इन पर भी फैसला संभव है।
एनपीए से निपटने के लिए उठाए ये कदम
ऐसा नहीं है कि सरकार और आरबीआई ने बैंकों को एनपीए की मार से निजात दिलाने के लिए कोई कदम नहीं उठाए हैं। लेकिन उसके बावजूद भी ये समस्या बनी हुई है।
1. बैंकों को 2 लाख करोड़
सरकार ने अभी कुछ महीने पहले ही बैंको के लिए रीकैपटिलाइजेशन प्लान को मंजूरी दी थी। बैंकों को ये पैसा 2 साल के दौरान दिए जाने है। जिसमें 1.35 लाख करोड़ रुपए का रीकैपटिलाइजेशन बॉन्ड लाया जाएगा। सरकार को उम्मीद है कि इससे बैंकों की स्थिति में सुधार देखा जा सकेगा।
2. बड़े बैंकों का विलय
सरकार देश के कई बड़े सरकारी बैंकों का विलय कर रही है। साथ ही बैंकों को निर्देश दिया गया है कि जिन बैंकों की ब्रांच मंें ज्यादा ट्रांजैक्शन नहीं होता है उसे बंद किया जाए। 2017 में ही एसबीआई के सहयोगी बैंकों के विलय की मंजूरी के बाद सरकार ने पीएनबी, कैनरा बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा समेत 26 बैंकों के विलय का प्रपोजल दे चुकी है।
3. आरबीआई का प्रयास
सरकार के साथ साथ आरबीआई ने भी एनपीए से निपटने के लिए कई प्रयास किए है। आरबीआई ने ऐसे खातों की पहचान कर उनपर कार्रवाई करने के आदेश दिए हैं जिनपर देश के सभी बैंकों के एनपीए का 25 फीसदी हिस्सा है।