
Rajim Triveni Sangam: सावन मास के प्रथम दिन धर्मनगरी राजिम में आस्था, आध्यात्म और प्रकृति का अद्भुत दृश्य देखने को मिला। क्षेत्र में लगातार हो रही भारी बारिश के चलते त्रिवेणी संगम का जलस्तर अचानक बढ़ गया। उफनती महानदी, पैरी और सोंढूर नदियों के जलभराव के बीच बाढ़ का पानी टापू पर स्थित भगवान कुलेश्वरनाथ महादेव मंदिर के गर्भगृह तक पहुंच गया। श्रद्धालुओं ने इस विहंगम दृश्य को स्वयं गंगा मैया द्वारा महादेव का किया गया प्राकृतिक जलाभिषेक माना। इस अलौकिक क्षण का वीडियो भी दिनभर सोशल मीडिया पर वायरल होता रहा।
त्रिवेणी संगम पर उफान और बाढ़ का विहंगम नजारा देखने के लिए सुबह से ही हजारों लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। स्थानीय नागरिकों के अलावा रायपुर, दुर्ग, भिलाई, बिलासपुर और महासमुंद से बड़ी संख्या में पर्यटक एवं श्रद्धालु राजिम पहुंचे। शाम ढलते तक महानदी पुल से लेकर पर्यटन विभाग के स्वागत द्वार तक मेले जैसा माहौल बना रहा। बाढ़ के खतरे को देखते हुए पुलिस और प्रशासन ने सतर्कता बरतते हुए लक्ष्मण झूला तथा नदी की ओर जाने वाले सभी रास्तों पर बांस की बैरिकेडिंग कर दी। सुरक्षा कारणों से आवाजाही रोके जाने के कारण कई दूर-दराज से आए श्रद्धालु मंदिर तक नहीं पहुँच सके, फिर भी उन्होंने प्रशासन के कड़े सुरक्षा इंतजामों की सराहना की।
नगर के बुजुर्गों के अनुसार, पिछले 10 से 12 वर्षों में ऐसा दुर्लभ दृश्य पहली बार देखने को मिला है जब बाढ़ का पानी सीधे कुलेश्वरनाथ महादेव के गर्भगृह तक पहुँच गया हो। हालांकि, दोपहर बाद जलस्तर में धीरे-धीरे कमी आने लगी, लेकिन लोग घंटों महानदी पुल पर खड़े होकर इस प्राकृतिक नजारे को अपने कैमरों और मोबाइल में कैद करते नजर आए।
सावन के पहले दिन राजिम के सभी प्राचीन शिव मंदिरों में सुबह से ही भक्तों का तांता लगा रहा। हर-हर महादेव और ओम नम: शिवाय के जयकारों के साथ श्रद्धालुओं ने स्वयंभू शिवलिंगों पर जल, बेलपत्र व धतूरा अर्पित कर क्षेत्र की सुख-समृद्धि की कामना की।
गरियाबंद जिले में पिछले कई दिनों से लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने जनजीवन को पूरी तरह प्रभावित कर दिया है। जिले के अधिकांश नदी-नाले उफान पर हैं और कई स्थानों पर पानी सडक़ों एवं पुल-पुलियों के ऊपर से बह रहा है। सबसे अधिक असर छुरा विकासखंड में देखने को मिल रहा है, जहां कई ग्रामीण क्षेत्रों का संपर्क मुख्यालय से टूट गया है। लगातार बारिश के चलते लोगों का दैनिक जीवन अस्त-व्यस्त हो गया है और ग्रामीण क्षेत्रों में बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं। छुरा से बागबाहरा को जोडऩे वाली सुखा नदी का जलस्तर मंगलवार को लगातार बढ़ता रहा। देखते ही देखते नदी का पानी पुल के ऊपर से बहने लगा।
हालात की गंभीरता को देखते हुए पुलिस और प्रशासन की टीम तत्काल मौके पर पहुंची और पुल के दोनों ओर बैरिकेडिंग कर आवाजाही पूरी तरह बंद करा दी। पुलिस जवानों को मौके पर तैनात किया गया है ताकि कोई भी व्यक्ति जान जोखिम में डालकर पुल पार करने की कोशिश न करे। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जलस्तर सामान्य होने के बाद ही मार्ग को दोबारा खोला जाएगा।
सुखा नदी पुल बंद होने से छुरा, बागबाहरा और गरियाबंद के बीच आवागमन पूरी तरह प्रभावित हो गया है। रोजाना इस मार्ग से आवागमन करने वाले कर्मचारी, व्यापारी, छात्र-छात्राएं और ग्रामीणों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। वहीं छुरा विकासखंड से जातर सहित कई गांवों का संपर्क भी बाधित हो गया है।
मौसम विभाग ने अगले 24 घंटों के दौरान गरियाबंद जिले में भारी से अति भारी वर्षा की संभावना जताई है। चेतावनी को देखते हुए जिला प्रशासन पूरी तरह सतर्क है और संवेदनशील क्षेत्रों की लगातार निगरानी की जा रही है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि किसी भी स्थिति में उफनते नदी-नालों, पुल-पुलियों को पार करने का प्रयास न करें, अनावश्यक यात्रा से बचे और प्रशासन और पुलिस द्वारा जारी निर्देशों का पालन करें। अधिकारियों ने कहा है कि लोगों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और हालात सामान्य होने के बाद ही बंद मार्गों पर यातायात बहाल किया जाएगा।