
झमाझम से टूटा 12 साल का रिकॉर्ड (फोटो सोर्स- पत्रिका)
Mahasamund Rainfall Record: आसमान से बरसे मेघों ने जुलाई के आखिरी सप्ताह में ऐसा रंग दिखाया कि वर्षों पुराने बारिश के रिकॉर्ड बौने पड़ गए। पिछले 48 घंटे में 200 मिमी से अधिक बारिश ने पूरे महासमुंद जिले को तरबतर कर दिया और 1 जून से 30 जुलाई तक औसत वर्षा 720 मिमी पहुंच गई। इसके साथ ही जुलाई तक होने वाली वर्षा का 12 वर्षों का रिकॉर्ड टूट गया।
इससे पहले वर्ष 2014 में इसी अवधि तक 716.2 मिमी बारिश दर्ज हुई थी। अब निगाहें वर्ष 2009 के उस रिकॉर्ड पर टिक गई हैं, जब 31 जुलाई तक जिले में 863 मिमी वर्षा दर्ज की गई थी। यदि मानसून की यही रफ्तार बनी रही तो जिले का सबसे बड़ा वर्षा रिकॉर्ड भी इतिहास बन सकता है। इस बार मानसून ने जिले के अलग-अलग हिस्सों में अलग तस्वीर पेश की है।
पिथौरा और सरायपाली में बादल सबसे अधिक मेहरबान रहे, जबकि महासमुंद, बागबाहरा और कोमाखान में अपेक्षाकृत कम वर्षा दर्ज हुई। जुलाई के अंत तक जिले में सामान्य से 49 प्रतिशत अधिक बारिश हो चुकी है, जिससे खरीफ फसलों को व्यापक लाभ मिलने की उम्मीद है। हालांकि लगातार हो रही बारिश के कारण निचले खेतों में जलभराव की स्थिति भी बनने लगी है।
1 जून से 30 जुलाई तक महासमुंद विकासखंड में 565.7 मिमी, सरायपाली में 909.4 मिमी, बसना में 773.5 मिमी, पिथौरा में 913.6 मिमी, बागबाहरा में 587.6 मिमी तथा कोमाखान में 574.4 मिमी वर्षा रिकॉर्ड की गई है। केवल 30 जुलाई को महासमुंद में 16.9 मिमी, सरायपाली में 33 मिमी, बसना में 14.5 मिमी, पिथौरा में 18.4 मिमी, बागबाहरा में 18.3 मिमी तथा कोमाखान में 32 मिमी बारिश दर्ज हुई। जिले की औसत दैनिक वर्षा 22 मिमी रही।
कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक आरएल शर्मा ने बताया कि आने वाले कुछ दिनों तक वर्षा की संभावना बनी हुई है। किसानों को सलाह दी गई है कि जिन खेतों में पानी भर रहा है, वहां अतिरिक्त पानी की निकासी की व्यवस्था समय रहते ही कर लें।
इस बार जिले में सबसे ज्यादा नजरें सरायपाली विकासखंड के बारिश के आंकड़ों पर टिकी हुई हैं। यहां मानसून ने शुरुआत से ही जोरदार असर दिखाया है। 30 जुलाई तक सरायपाली में कुल 909.4 मिमी वर्षा दर्ज की जा चुकी है, जो पिछले कई वर्षों के रिकॉर्ड के बेहद करीब पहुंच चुकी है। वर्ष 2014 में 31 जुलाई तक 934 मिमी बारिश का सर्वकालिक रिकॉर्ड दर्ज हुआ था।
वर्तमान स्थिति में सरायपाली इस पुराने रिकॉर्ड से महज करीब 25 मिमी पीछे है। मौसम विभाग के अनुसार अगले 24 घंटे में क्षेत्र में अच्छी बारिश की संभावना बनी हुई है। ऐसे में यदि बारिश का सिलसिला जारी रहा तो जुलाई माह में अब तक का सबसे बड़ा वर्षा रिकॉर्ड टूट सकता है। खास बात यह है कि पिछले कुछ वर्षों में सरायपाली ने इतनी तेज रफ्तार से बारिश दर्ज नहीं की थी। वर्ष 2020 में 31 जुलाई तक दर्ज 774 मिमी वर्षा का आंकड़ा इस बार काफी पीछे छूट चुका है। अब सभी की निगाहें अगले 24 घंटे के मौसम पर टिकी हैं।
जिले के वर्षा इतिहास में वर्ष 2009 अब भी सबसे ऊपर दर्ज है। उस वर्ष 31 जुलाई तक औसत 863 मिमी बारिश रिकॉर्ड की गई थी, जो आज भी कायम है। यही नहीं, महासमुंद विकासखंड में भी उसी वर्ष 990 मिमी वर्षा दर्ज हुई थी, जो अब तक का सर्वाधिक आंकड़ा है। इस बार जिला औसत 720 मिमी तक पहुंच चुका है और यदि मानसून अगले एक-दो दिन इसी तरह सक्रिय रहा तो 17 वर्ष पुराना यह रिकॉर्ड भी खतरे में पड़ सकता है। वर्तमान परिस्थितियां रिकॉर्ड वर्षा के अनुकूल बनी हुई हैं।
पिथौरा विकासखंड में इस वर्ष मानसून ने सबसे ज्यादा असर दिखाया है। यहां 30 जुलाई तक 913.6 मिमी वर्षा दर्ज हो चुकी है। वर्ष 2009 में 927 मिमी बारिश का सर्वकालिक रिकॉर्ड बना था। मौजूदा स्थिति में दोनों आंकड़ों के बीच महज 13 मिमी का अंतर रह गया है। खास बात यह है कि पिछले 16 वर्षों में पिथौरा कभी भी 900 मिमी के आंकड़े तक नहीं पहुंच पाया था। इसलिए वर्ष 2026 पहले ही पिछले डेढ़ दशक का सबसे अधिक वर्षा वाला साल बन चुका है। यदि अगले एक-दो दिन अच्छी बारिश होती है तो पिथौरा का सर्वकालिक रिकॉर्ड भी बदल सकता है।
Updated on:
31 Jul 2026 04:23 pm
Published on:
31 Jul 2026 04:23 pm
