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ढोल-नगाड़ों के बीच दर्जनों जहरीले सांपों की शोभायात्रा, गरियाबंद में ऋषि पंचमी पर निभाई गई अनोखी परंपरा

Gariaband News: ऋषि पंचमी पर गरियाबंद के देवरी गांव में अनोखी सर्प शोभायात्रा निकली। जहरीले सांपों के साथ निकली यात्रा देखने बड़ी संख्या में लोग पहुंचे।
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गरियाबंद

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Laxmi Vishwakarma

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Updated: 15 Sep 2026, 6:54 PM IST

Snake Procession

सड़कों पर निकले दर्जनों जहरीले सांप (Photo Source- Patrika)

Snake Procession: छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले में ऋषि पंचमी के अवसर पर एक अनोखी परंपरा देखने को मिली। राजिम इलाके के ग्राम देवरी में सांवरा समाज के लोगों ने विधि-विधान से सर्पों की पूजा-अर्चना की। इसके बाद जहरीले सांपों को शोभायात्रा में शामिल कर पूरे गांव में यात्रा निकाली गई। ढोल-नगाड़ों की गूंज और पारंपरिक वेशभूषा के बीच निकली इस शोभायात्रा को देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग जुटे।

Rishi Panchami: सांपों के साथ निकली शोभायात्रा ने खींचा ध्यान

ऋषि पंचमी पर आयोजित इस आयोजन में सर्पों को विशेष रूप से पूजा गया। पूजा के बाद सांपों को लेकर गांव में शोभायात्रा निकाली गई। सड़क के दोनों ओर बड़ी संख्या में ग्रामीण और आसपास के क्षेत्रों से पहुंचे लोग इस अनोखे आयोजन को देखते नजर आए। ढोल-नगाड़ों के बीच जब जहरीले सांप शोभायात्रा का हिस्सा बने तो लोगों का ध्यान उनकी ओर खिंच गया। आयोजन की तस्वीरें और वीडियो भी लोगों के बीच चर्चा का विषय बने हुए हैं।

वर्षों पुरानी है सर्प पूजा की परंपरा

ग्राम देवरी में ऋषि पंचमी के दिन सर्प पूजा और शोभायात्रा निकालने की परंपरा वर्षों से चली आ रही है। सांवरा समाज के लोग इस दिन धार्मिक विधि-विधान के साथ सर्पों की पूजा करते हैं। समाज की मान्यता और परंपरा के अनुसार सर्पों को पूजा में विशेष स्थान दिया जाता है। इसके बाद पूरे गांव में शोभायात्रा निकाली जाती है। इस आयोजन में समाज के लोगों के साथ आसपास के गांवों से भी लोग शामिल होते हैं।

सर्पदंश से बचाव की जानकारी भी दी जाती है…

इस आयोजन की एक खास बात केवल सर्प पूजा तक सीमित नहीं है। यहां सर्पदंश से बचाव और उसके उपचार को लेकर ग्रामीणों को जानकारी भी दी जाती है। गांव में स्थित गुरु सांवरा पाठशाला में पूरे साल सर्पदंश से जुड़े उपचार और बचाव को लेकर ग्रामीणों को प्रशिक्षण दिया जाता है। ऋषि पंचमी के अवसर पर इसी प्रशिक्षण से जुड़े दीक्षांत समारोह का भी आयोजन किया जाता है। इसका उद्देश्य ग्रामीणों को सर्पदंश की स्थिति में जरूरी जानकारी और प्राथमिक उपचार के बारे में जागरूक करना है।

पूजा के बाद सांपों को जंगल में छोड़ने की परंपरा

धार्मिक आयोजन और पूजा पूरी होने के बाद सर्पों को जंगल में छोड़ने की परंपरा भी यहां निभाई जाती है। यानी शोभायात्रा के बाद सांपों को उनके प्राकृतिक आवास में वापस पहुंचाया जाता है। गरियाबंद के देवरी गांव की यह परंपरा ऋषि पंचमी के आयोजन को बाकी जगहों से अलग बनाती है। धार्मिक आस्था, लोक परंपरा और सर्प संरक्षण से जुड़ा यह आयोजन हर साल लोगों के आकर्षण का केंद्र रहता है।

सुरक्षा के साथ ऐसे आयोजनों को लेकर जागरूकता जरूरी

जहरीले सांपों के साथ किसी भी तरह का आयोजन जोखिम भरा हो सकता है। ऐसे में सर्पों को संभालने और बाद में उन्हें सुरक्षित रूप से प्राकृतिक वातावरण में छोड़ने के दौरान प्रशिक्षित लोगों और उचित सुरक्षा व्यवस्था का होना जरूरी है। देवरी में इस परंपरा के साथ सर्पदंश से बचाव की जानकारी दिए जाने को भी आयोजन का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।