
जानकारी के अनुसार लाटापारा निवासी मधुसूदन ने बताया कि पटवारी फौती काटने के बाद बार-बार पैसों की मांग करते हुए परेशान कर रहा था। इसी के चलते वह परेशान हो चुका था। ऐसे में उसने पैसे देते हुए पटवारी का वीडियो बनाया। वीडियो सामने आने के बाद पटवारी ने सफाई देते हुए कहा कि अप्रैल माह में ही फौती काट दिया था। वहीं यदि उसकी नियत लेनेदेन करने की होती तो वह फौती बाद में काटता। पहले किसान से लेनदेन करता। पटवारी बांधे ने बताया कि गांव में सभी मिलकर खाना खाए थे। उसके बदले में भरी भीड़ में पैसे ले रहा था।
रिश्वत दिए जाने का आरोप बिल्कुल गलत है। वीडियो बनाने वाले मधुसूदन बघेल ने बताया कि मामले में पटवारी बार-बार पैसा दिए जाने की मांग करता आ रहा था। ऐसे में उसने गत 14 सितंबर को इस संबंध में जिला जनदर्शन के वेबपेज पर लिखित शिकायत की थी। पटवारी शेखर बांधे द्वारा फौती काटने के एवज में जगह-जगह रुपए की मांग कर रहा है। गांव के कुछ लोगों के सामने चौराहे में विडियो बनाकर अपलोड करने का जिक्र करते हुए कार्रवाई की मांग भी की जा रही थी।
वीडियो वायरल होने के बाद पटवारी ने अपनी सफाई पेश करते हुए बताया कि उसने कभी किसी से रिश्वत नहीं मांगा। बांधे की माने तो मधुसूदन के पिता का फौती अप्रैल माह में ही कट गया था। पटवारी ने दावा किया है वीडियो भी मई और जून महीने के आसपास का ही है पटवारी की माने तो गांव के युवकों से उसके अच्छे संबंध बन गए थे। इसी के चलते छुट्टी के दिनों में गांव के कुछ युवकों के साथ बैठकर भोजन भी करते थे। एक दिन के भोजन का खर्च देने की बारी मधु की आई। उसके पास पैसे नहीं थे तो खर्च मैंने कर दिया। उसी को वापस लिया। मामले में मैं भी शिकायत कर मुझे फंसाने वालों पर कार्रवाई की मांग करूंंगा।