महिला के घर वालों का हाल देखकर महिला को केरल से लेकर आने वाले एनजीओ के सदस्य भी रह गए हक्के-बक्के
ग़ाज़ियाबाद. दीपावली के त्योहार के मौके पर लोग अपनों के साथ-साथ दूसरों की भी मदद करते हैं, ताकि उनकी दिवाली में भी चमक आ जाए। लेकिन इस कलयुग में ऐसे भी लोग हैं, जो दिवाली के इस मौके पर दूसरे तो दूर अपनी सगी मां की भी मदद को तैयार नहीं है। जी हां, जिन बच्चों को एक मां ने रातों की नींद जाया कर उन्हें नई जिंदगी दी। वही बच्चे आज अपनी मां को दिवाली के इस पावन मौके पर भी अपनाने से इनकार कर रहे हैं। दरअसल, साहिबाबाद के लाजपत नगर से एक महिला छः साल पहले अचानक ही गायब हो गई थी। जब केरला में काम करने वाले एक एनजीओ के सदस्यों ने उन्हें वापस उसके घर लेकर लेकर आए तो परिजन खुश होने के बजाय उसे अपनाने से मना कर दिया। अब इस महिला के सामने नया संकट आ गया है कि आखिर वे जाएं तो कहां जाएं।
ग़ाज़ियाबाद के लाजपत नगर से छः साल पहले एक महिला मानसिक रूप से बीमार होने के कारण अचानक घर से गायब हो गई थी। महिला भटकते हुए रेल से केरला पहुंच गयी थी । केरला में पहुंचने पर उसे एक एनजीओ ने रख लिया और उसका उपचार कराया । छ साल चले उपचार के बाद महिला की याददाश्त लौट आई तो उसने एनजीओ को अपना पता ग़ाज़ियाबाद के लाजपतनगर के L ब्लॉक का बताया । इसके बाद एनजीओ के सदस्य उन्हें लेकर जब उसके घर पहुंचे तो उसकी बहन, बेटी और बेटे ने उसे अपनाने से इनकार कर दिया ।
वहीं, याददाश्त लौटने पर वापस आई महिला अपने को दिल्ली पुलिस में बता रही है । उसका कहना है कि वो अब परिवार के साथ ही रहना चाहती है ।इसके साथ ही महिला बार -बार परिवार के लोगों से वह खुद को अपनाने की गुहार लगा रही है। जब परिवार ने उसे नहीं अपनाया तो एनजीओ उसे लेकर थाने पहुंचा। थाने में भी ये महिला परिवार के साथ जाने की बात कहकर परिवार से अपनाने की गुहार लगाती रही।