। पठानकोट के एयरबेस में 2 जनवरी को हुए आतंकी हमले में
अपनी आंखें गंवाने के बावजूद कमांडो राजेश नेगी ने दो आतंकियों को ढेर कर
दिया। घर लौटे गाजियाबाद स्थित वसुंधरा निवासी राजेश नेगी ने हमले की कहानी
लोगों को सुनाई।
वसुंधरा में रहने वाले इस बहादुर नेगी ने ढाई
हजार लोगों की जान बचाने के लिए अपनी जान तक की परवाह नहीं की और इसी दौरान
उन्होंने अपनी दोनों आंखें गंवा दीं। पठानकोट में आतंकी के सर्च ऑपरेशन
खत्म होने के 14 दिन तक इलाज पूरा होने के बाद वह 18 जनवरी को अपने घर लौट
आएं। जहां लोगों ने गर्मजोशी से उनका स्वागत किया।
देशवासियों की जान बचाना मेरा पहला कर्म
राजेश
ने बताया कि पठानकोट एयरबेस में आतंकियों के घुसने की जानकारी मिलते ही वह
अपने साथियों के साथ सर्च अभियान में जुट गए थे। करीब ढाई हजार की आबादी
वाले लिविंग एरिया के पास उनका आमना-सामना आतंकियों से हआ तो उनके सामने
सबसे बड़ी चुनौती लोगों की जान बचाना था।
अातंकियों ने फेंका ग्रेनेड
उन्होंने
आतंकियों को ललकारा तो हमलावरों ने उनके ऊपर ग्रेनेड फेंक दिया। ग्रेनेड
फटते ही उसके छर्रे राजेश के शरीर में घुस गए। उसी में से कुछ छर्रे उनकी
आंखों में चले गए और वह घायल हो गए। इस हाल में भी उन्होंने अन्य जवानों के
साथ मिलकर दो आतंकियोें को ढेर कर दिया। करीब 14 दिन के इलाज के बाद
सोमवार शाम नेगी अपनी पत्नी यशोदा, मां हेमा, पिता हर्ष नेगी, बेटी दिशा और
बेटे आरव के साथ अपने घर पहुंचे।
आरडब्लयूए ने स्वागत में नहीं छोड़ी कोई कसर
नेगी
के एंट्री करते ही सोसायटी गेट पर ही आरडब्लयूए प्रेजिडेंट डॉ. अनुज
त्यागी व अन्य लोगों ने नेगी काे फूलमाला पहनार्इ और कंधे पर उठाकर सोसययटी
में घुमाकर उनका जोरदार स्वागत किया। इसके बाद मोहल्ले में मिठाई बांटी
गई। हर कोई नेगी से हाथ मिलाना चाहता था।
छुट्टी के बीच में निकल पड़ा आतंकियों से भिड़ने
नवंबर
में नेगी अपने घर लौटे थे। दिसंबर में उन्होंने ड्यूटी ज्वॉइन कर ली थी। 2
जनवरी को एयरबेस पर हुए हमले के बाद एनएसजी को कॉल की गई। कमांडो ग्रुप ने
फौरन वहां मोर्चा संभाला। 3 जनवरी की रात घायल होने के बाद अगले दिन
उन्होंने अपनी पत्नी यशोदा को फोनकर घटना की जानकारी दी थी, जिसके बाद
परिजन आर्मी अस्पताल पहुंच गए थे।
राजेश
नेगी के पिता हर्ष ने बताया कि सेना में उनकी दूसरी पीढ़ी चल रही है। उनके
छोटे भाई उत्तम नेगी कारगिल युद्घ में शहीद हुए थे। छोटा भाई कुंवर सिंह
नेगी चार कुमांऊ रेजीमेंट में हवलदार है। राजेश ने अपने परिवार की परंपरा
के अनुसार बहादुरी का काम किया है।