गाज़ियाबाद

समाजवादी पार्टी ने भाजपा के उड़ाए होश, पार्टी ने अपने 20 नेताओं को कैराना कूच करने का भेजा फरमान

सपा की रणनीति सफल रही तो भाजपा के लिए अपनी सीट बचाना भी होगा मुश्किल
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गाजियाबाद. कैराना में होने वाले उपचुनाव में समाजवादी पार्टी कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती है। चुनाव की तारीख नजदीक आते ही सपा ने कमर कस ली है। इस चुनाव में हर हाल में जीत हासिल करने के लिए सपा हाईकमान ने पार्टी के 20 नेताओं को तुरंत कैराना जाकर गठबंधन की प्रत्यशी तबस्सुम हसन के चुनाव मे दम भरने के निर्देश भेजे गए हैं। इन नेताओं को कैराना पार्टी कार्यालय पर जाकर अपनी आमद करानी होगी। जिन नेताओ को भेजा जाएगा, उनमें मुख्य रूप से राकेश यादव एमएलसी जितेन्द्र यादव । जिलाध्यक्ष सुरेन्द्र मुन्नी, महानगर अध्यक्ष राहुल चौधरी, पूर्व विधायक जाकिर अली, पूर्व महानगर अध्यक्ष सजंय यादव पूर्व जिलाध्यक्ष साजिद हुसैन और अन्य शामिल है।

उधर, भाजपा को करारा जवाब देने के लिए गाजियाबाद से समाजवादी पार्टी के तमाम नेताओं की एक टीम कैराना के लिए रवाना हो चुकी है। समाजवादी पार्टी के सभी नेताओं में खासा उत्साह भरा हुआ है और उनका कहना के इस बार कैराना में होने वाले उपचुनाव में भाजपा को करारा झटका दिया जाएगा चाहे उन्हें घर-घर जाकर भाजपा सरकार के कार्यों को बताना पड़े। दरअसल, जो वादे भाजपा सरकार ने सरकार बनने से पहले लोगों से किए थे और वह अभी तक पूरे नहीं कर पाई है। इसके अलावा समाजवादी पार्टी के सभी नेता समाजवादी पार्टी की सरकार के दौरान किए गए तमाम कार्यों के बारे में लोगों को अवगत कराएंगे, ताकि लोग कैराना में होने वाले उपचुनाव में भाजपा को आईना दिखा सकें।

कैराना जाने वाले इन नेताओं में सभी 20 ऐसे नेताओं के नाम हैं, जिन्हें चुनाव लड़ाने में पारंगत हासिल मानी जाती है। अब देखने वाली बात यह होगी कि सपा की यह रणनीति कामयाब हो पाती है या नहीं।

दरअसल, भाजपा ने इस सीट से अपने दिवंगत सांसद हुकुम सिंह की बेटी मृगांका सिंह को उम्मीदवार बनाया है। भाजपा को उम्मीद है कि उसे सहानुभूति का फायदा मिलेगा। इसके साथ ही भाजपा को लोक दल के प्रत्याशी कमर हसन के मैदान में आने से मुस्लिम वोटों के बंटने की संभावना को देखते हुए भी जीत की उम्मीद दिख रही है। हालांकि, इस उप चुनाव में मुकाबला बहुत ही दिलचश्प होने की संभावना है, क्योंकि इस बार कांग्रेस और बसपा ने भी अपने उम्मीदवार नहीं उतारे हैं, जिसका फायदा भी सप-रालोद के संयुक्त उम्मीदवार तबस्सुम हसन को मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। अगर तबस्सुम हसन को मुसलमानों के साथ ही दलित और जाट वोट भी मिल गए तो उसे हराना भाजपा के लिए संभव नहीं होगा।

Published on:
14 May 2018 02:58 pm
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