गोंडा के पिपरा भिटौरा गांव में झोपड़ी में लगी आग और सिलेंडर ब्लास्ट में 60 वर्षीय चाचा ने भतीजे को बचाने के लिए जान दे दी। युवक घायल है। गांव में शोक का माहौल है।
गोण्डा जिले के मोतीगंज थाना क्षेत्र में शुक्रवार को एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई, जहां झोपड़ी में लगी आग ने एक परिवार की खुशियां छीन लीं। आग की तेज लपटों के बीच सिलेंडर फटने से हालात और भयावह हो गए। भतीजे को बचाने के लिए आग में कूदे 60 वर्षीय चाचा की जलकर मौत हो गई, जबकि युवक किसी तरह बच गया।
मोतीगंज थाना क्षेत्र के पिपरा भिटौरा गांव में शुक्रवार को अचानक लगी आग ने एक दर्दनाक हादसे का रूप ले लिया। जानकारी के अनुसार, रमवापुर गांव निवासी सोनू के फूस के मकान में अज्ञात कारणों से आग भड़क उठी। देखते ही देखते आग ने पूरी झोपड़ी को अपनी चपेट में ले लिया। घर में रखा घरेलू एलपीजी सिलेंडर आग की तीव्र गर्मी सहन नहीं कर पाया और जोरदार धमाके के साथ फट गया। सिलेंडर विस्फोट के बाद आग और तेजी से फैल गई। जिससे वहां मौजूद सोनू बुरी तरह झुलसने लगा। अपने भतीजे को आग में घिरा देख 60 वर्षीय श्यामलाल ने बिना कुछ सोचे-समझे जान की परवाह किए बिना जलती झोपड़ी में छलांग लगा दी। उन्होंने किसी तरह सोनू को बाहर निकाल लिया। लेकिन खुद आग की लपटों में बुरी तरह फंस गए।
ग्रामीणों ने साहस दिखाते हुए आग बुझाने का प्रयास किया। कड़ी मशक्कत के बाद स्थिति पर काबू पाया। हालांकि तब तक काफी देर हो चुकी थी। गंभीर रूप से झुलसे श्यामलाल को बाहर निकाला गया। लेकिन उनकी मौके पर ही मौत हो गई। वहीं घायल सोनू को तुरंत उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया गया। जहां उसका इलाज जारी है। घटना के बाद पूरे गांव में शोक और सन्नाटा छा गया। एक ओर जहां परिवार ने अपने बुजुर्ग सदस्य को खो दिया। वहीं दूसरी ओर गांव वाले श्यामलाल के साहस की चर्चा कर रहे हैं। जिन्होंने अपनी जान देकर भतीजे को बचा लिया।
पुलिस ने मौके पर पहुंचकर शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। अधिकारियों का कहना है कि आग लगने के कारणों की जांच की जा रही है। साथ ही राजस्व विभाग की टीम को नुकसान का आकलन करने के निर्देश दिए गए हैं।