गोंडा

Gonda News: किसान फसलों में ऐसे करें मल्चिंग, सुधरेगी की मिट्टी की सेहत बढ़ेगा उत्पादन

Gonda News: गोंडा जिले के उद्यान विभाग परिसर में राष्ट्रीय कृषि विकास योजना अंतर्गत दो दिवसीय मेले का आयोजन किया गया। जिसमें किसानों को उद्यान विभाग के माध्यम से चलाई जा रही योजनाएं तथा फसलों में मल्चिंग करने की विधि का विस्तृत जानकारी दी गई। मल्चिंग करने से मिट्टी की सेहत सुधारने के साथ फसलों का उत्पादन बढ़ता है।

3 min read
Dec 11, 2024
किसानों को जानकारी देती डीएम नेहा शर्मा

Gonda News: राष्ट्रीय कृषि विकास योजना अंतर्गत उद्यान विभाग द्वारा मेले का आयोजन किया गया। डीएम नेहा शर्मा ने किसानों को उद्यान विभाग द्वारा संचालित योजनाओं के संबंध में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि किसान बन्धुओं के लिए विभिन्न प्रकार की योजनाएं चलाई जा रही हैं। जिसका लाभ किसानों को सीधे मिल रहा है। कार्यक्रम में उत्कृष्ट कार्य करने वाले किसानों को तथा विभाग में उत्कृष्ट कार्य करने वाले कर्मचारियों को डीएम ने सम्मानित किया। किसानों को फसलों में मल्चिंग करने के महत्व पर विशेष प्रकाश डाला गया।

Gonda News: किसान फसलों के अवशेष को खेतों में न जलाएं। इससे मिट्टी की सेहत खराब होती है। तथा फसलों को लाभ पहुंचाने वाले तमाम जीवाणु नष्ट हो जाते हैं। किसान अपने फसलों के अवशेष गन्ने और पेड़ों की सूखी पत्तियां से फसलों की नालियों के बीच मल्चिंग करने से पत्तियां सड़कर जैविक खाद का काम करती हैं।

मल्चिंग का महत्व

मल्चिंग की पत्तियां सड़कर जैविक खाद्य में बदलती हैं। जिससे मिट्टी में कार्बनिक पदार्थ की मात्रा बढ़ेगी। फसल अवशेष फसलों के लिए लगभग सभी पोषकतत्व पाए जाते हैं। जिससे फसले अच्छी होती हैं। उपज में वृद्धि होती है।मिट्टी में कार्बनिक पदार्थ के बढ़ने से मिट्टी में जलधारण क्षमता बढ़ जाती है। जिससे पानी की बचत होती है। मिट्टी में वायुसंचार में वृद्धि होता है। रासायनिक खादों का प्रयोग कम करके मिट्टी के स्वास्थ्य को सुधरता है।

मल्चिंग करने के लिए आवश्यक कार्य

फसलों में मल्चिंग करने के लिए एक एकड़ में लगभग 25 कुंतल सुखी गन्ने की पत्ती, पुवाल पेड़ों की पत्तियां या सूखी घास को किया जा सकता है। फसलों में दो लाइनों के बीच सुखी गन्ने की पत्ती, पुवाल पेड़ों की पत्तियां या सूखी घास को लगभग 8 से 10 सेंटीमीटर मोटी तह के रूप में बिछाना चाहिए। गन्ने में पेड़ी वाली गन्ने के फसल को काटने के तुरंत बाद ही मल्चिंग करना चाहिए तथा गन्ने की बुवाई में नए गन्ने के जमाव के बाद ही मल्चिंग करना चाहिए।

खेत में पत्ती जलाने से नुकसान

एक ग्राम मिट्टी में 10 से 35 करोड़ लाभकारी जीवाणु व एक से 2 लाख तक लाभकारी फफूंद जलकर नष्ट हो जाती हैं, मिट्टी की जलधारण क्षमता कम हो जाती है और सिंचाई ज्यादा करनी पड़ती है, 15 सेंटीमीटर तक पाए जाने वाले सूक्ष्म जीव व मित्र कीट नष्ट हो जाते हैं जिससे फसल में उत्पादन बहुत कम हो जाता है खेत में पत्ती जलाने से पोषक तत्व नष्ट हो जाते हैं।

मल्चिंग का महत्व

मल्चिंग की पत्तियां सड़कर जैविक खाद्य में बदलती हैं जिससे मिट्टी में कार्बनिक पदार्थ की मात्रा बढ़ेगी, फसल अवशेष फसलों के लिए लगभग सभी पोषकतत्व पाए जाते हैं जिससे फैसले अच्छी होती हैं और उपज में वृद्धि होती है।मिट्टी में कार्बनिक पदार्थ के बढ़ने से मिट्टी में जलधारण क्षमता बढ़ जाती है जिससे पानी की बचत होती है और मिट्टी में वायुसंचार में वृद्धि होती है तथा रासायनिक खादों का प्रयोग कम करके मिट्टी के स्वास्थ्य को सुधरता है।

मल्चिंग करने के लिए आवश्यक कार्य

फसलों में मल्चिंग करने के लिए एक एकड़ में लगभग 25 कुंतल सुखी गन्ने की पत्ती, पुवाल पेड़ों की पत्तियां या सूखी घास को किया जा सकता है। फसलों में दो लाइनों के बीच सुखी गन्ने की पत्ती, पुवाल पेड़ों की पत्तियां या सूखी घास को लगभग 8 से 10 सेंटीमीटर मोटी तह के रूप में बिछाना चाहिए। गन्ने में पेड़ी वाली गन्ने के फसल को काटने के तुरंत बाद ही मल्चिंग करना चाहिए तथा गन्ने की बुवाई में नए गन्ने के जमाव के बाद ही मल्चिंग करना चाहिए।

खेत में पत्ती जलाने से नुकसान

एक ग्राम मिट्टी में 10 से 35 करोड़ लाभकारी जीवाणु व एक से 2 लाख तक लाभकारी फफूंद जलकर नष्ट हो जाती हैं, मिट्टी की जलधारण क्षमता कम हो जाती है और सिंचाई ज्यादा करनी पड़ती है, 15 सेंटीमीटर तक पाए जाने वाले सूक्ष्म जीव व मित्र कीट नष्ट हो जाते हैं जिससे फसल में उत्पादन बहुत कम हो जाता है खेत में पत्ती जलाने से पोषक तत्व नष्ट हो जाते हैं।

Published on:
11 Dec 2024 07:53 pm
Also Read
View All

अगली खबर