किसानों के नाम पर मनमानी बिक्री और फर्जीवाड़ा पकड़े जाने के बाद गोंडा जिले में आठ उर्वरक विक्रेताओं के लाइसेंस रद्द कर दिए गए। प्रशासन ने भविष्य में और सख्ती की चेतावनी दी है।
गोंडा जिले में उर्वरकों की कालाबाजारी और नियमों की धज्जियां उड़ाने वालों पर जिला प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है। कृषि विभाग की जांच में गड़बड़ी पकड़े जाने के बाद आठ फुटकर उर्वरक विक्रेताओं के लाइसेंस तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिए गए। प्रशासन ने स्पष्ट संदेश दिया है कि किसानों के हक पर डाका डालने वालों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा।
गोंडा किसानों को समय पर और सही दर पर उर्वरक उपलब्ध कराने के लिए प्रशासन लगातार निगरानी कर रहा है। इसी कड़ी में जिला कृषि अधिकारी सी.पी. सिंह के नेतृत्व में की गई जांच में आठ फुटकर विक्रेताओं के खिलाफ गंभीर अनियमितताएं सामने आईं। कई दुकानदारों ने किसानों के नाम पर निर्धारित सीमा से अधिक यूरिया और अन्य उर्वरक खरीदे। एक ही किसान के नाम से 40 से 50 बोरी यूरिया तक उठाई गई, जो उर्वरक नियंत्रण आदेश-1985 का सीधा उल्लंघन है।
इसके अलावा जांच में यह भी पाया गया कि कुछ विक्रेताओं ने काल्पनिक नामों से बिक्री दिखाकर गड़बड़ी की। इस तरह की कालाबाजारी को रोकने के लिए विभाग ने सख्ती दिखाते हुए आठ विक्रेताओं के लाइसेंस रद्द कर दिए। इनमें मे0 वर्मा ट्रेडर्स (दौलतपुर माफी), मे0 हरिश्चन्द्र मिश्र (इटियाथोक), मे0 निसार अहमद (लखनीपुर), मे0 सिंह खाद एवं बीज भण्डार (छपिया), मे0 आर.के.वी.के. इंटरप्राइजेज (बेलसर), मे0 परवेज आलम बीज भण्डार (रूपईडीह), मे0 सियाराम (बभनजोत) और मे0 पाण्डेय खाद भण्डार (बेलसर) शामिल हैं।
जिला कृषि अधिकारी ने कहा कि भविष्य में यदि कोई विक्रेता किसानों के नाम पर मनमानी या फर्जी बिक्री करता पाया गया तो उसका लाइसेंस भी तुरंत रद्द कर दिया जाएगा। साथ ही किसानों से अपील की गई है कि वे उर्वरक खरीदते समय रसीद और पहचान पत्र अवश्य लें। ताकि किसी तरह की गड़बड़ी से बचा जा सके।