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गोंडा से बृजभूषण का बड़ा बयान: “युद्ध समाधान नहीं, बातचीत ही रास्ता, आवास पर होली महोत्सव बना चर्चा का केंद्र

गोंडा में होली महोत्सव के बीच पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह का बड़ा बयान सामने आया। युद्ध और वैश्विक तनाव पर उन्होंने जो कहा, उसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है—जानिए आखिर क्यों बढ़ी हलचल?

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पूर्व सांसद बृजभूषण सिंह फोटो सोर्स पत्रिका

पूर्व सांसद बृजभूषण सिंह फोटो सोर्स पत्रिका

गोंडा में तराई अंचल की सांस्कृतिक रंगत मंगलवार को उस समय खास नजर आई। जब पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह के आवास पर थारू जनजाति के बच्चों ने होली महोत्सव का आयोजन किया। पारंपरिक गीत-संगीत और नृत्य प्रस्तुतियों से सजे इस कार्यक्रम ने जहां दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया। वहीं समारोह से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया।

देवीपाटन मंडल के बलरामपुर, श्रावस्ती और बहराइच समेत तराई क्षेत्र के विभिन्न जनपदों से आए थारू समाज के बच्चों ने अपनी लोक परंपराओं की झलक पेश की। ढोलक की थाप पर गाए गए पारंपरिक होली गीतों और रंगारंग नृत्य ने माहौल को उत्सवमय बना दिया। बच्चों की प्रस्तुतियों को उपस्थित जनसमूह ने तालियों के साथ सराहा। कार्यक्रम में कैसरगंज से सांसद करन भूषण सिंह और गोंडा सदर से विधायक प्रतीक भूषण सिंह भी मौजूद रहे। जनप्रतिनिधियों ने बच्चों का उत्साहवर्धन करते हुए उन्हें अंगवस्त्र और उपहार भेंट किए। इस अवसर पर विधायक प्रतीक भूषण सिंह ने कहा कि थारू जनजाति देश की सांस्कृतिक विरासत का अहम हिस्सा है। ऐसे आयोजनों से समाज के विभिन्न वर्गों के बीच संवाद और सहभागिता बढ़ती है।

वर्तमान समय में कई देश अलग-अलग प्रकार के संघर्षों से जूझ रहे

समारोह के दौरान पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने वैश्विक परिस्थितियों पर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में कई देश अलग-अलग प्रकार के संघर्षों से जूझ रहे हैं। जिससे अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य अस्थिर बना हुआ है। उन्होंने विभिन्न देशों में हो रहे हमलों और हिंसक घटनाओं पर चिंता जताते हुए कहा कि युद्ध किसी भी समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सकता।

संवाद के माध्यम से शांति स्थापित की जा सकती

उन्होंने यह भी कहा कि दुनिया अब पहले की तुलना में कहीं अधिक जुड़ी हुई है। ऐसे में किसी एक क्षेत्र की घटना का प्रभाव अन्य देशों पर भी पड़ता है। खाड़ी देशों में कार्यरत भारतीयों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि विदेशों में रह रहे भारतीयों और उनके परिवारों की चिंता भी स्वाभाविक है। शेयर बाजारों में उतार-चढ़ाव का उल्लेख करते हुए उन्होंने वैश्विक अस्थिरता के आर्थिक प्रभावों की ओर संकेत किया। पूर्व सांसद ने बातचीत और कूटनीति को ही आगे का रास्ता बताते हुए कहा कि संवाद के माध्यम से ही शांति स्थापित की जा सकती है। उन्होंने उम्मीद जताई कि विश्व समुदाय आपसी सहमति और वार्ता के जरिए तनावपूर्ण स्थितियों का समाधान खोजेगा।