गोंडा

मम्मी अब मैं नहीं पढ़ूंगी? भाभी मुझे माफ कर देना यह कहकर चली गई रूपा, गोंडा में रिजल्ट बना मौत की वजह?

गोंडा में 77 प्रतिशत अंक आने के बावजूद लक्ष्य से कम नंबर से आहत छात्रा ने जहरीला पदार्थ खाकर जान दे दी। जाते समय उसने अपने भाभी से माफी मांगी। अब उसके शब्द परिवार के कानों में गूंज रहे हैं।

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Apr 24, 2026
मृतका की फाइल फोटो सोर्स परिजन

गोंडा जिले के एक छोटे से गांव में एक छात्रा के अधूरे सपनों ने पूरे परिवार को जिंदगी भर का दर्द दे दिया। हाईस्कूल में अच्छे अंक लाने के बावजूद अपेक्षा से कम नंबर आने पर वह खुद को संभाल नहीं सकी। कुछ ही घंटों में खुशी का माहौल मातम में बदल गया। जाते-जाते उसके शब्द भाभी माफ कर देना। आज परिवार के कानों में गूंज रहे हैं।

गोंडा के देहात कोतवाली क्षेत्र के भीटी भदवाल गांव में रहने वाली 19 वर्षीय रूपा गुप्ता की कहानी अब सिर्फ एक खबर नहीं, बल्कि उन हजारों छात्रों के दबाव की तस्वीर बन गई है। जो अंक और अपेक्षाओं के बोझ तले दब जाते हैं। रूपा ने हाईस्कूल की परीक्षा में 600 में से 464 अंक हासिल किए थे। जो करीब 77.33 प्रतिशत हैं। यह परिणाम सामान्य तौर पर अच्छा माना जाता है। लेकिन रूपा के लिए यह उसके सपनों से कम था।

लक्ष्य के हिसाब से नंबर नहीं आए तो जहर खा कर दे दी जान

रूपा ने अपने लिए 80 प्रतिशत से अधिक अंक का लक्ष्य तय किया था। उसने उसी के अनुसार मेहनत भी की थी। लेकिन जब परिणाम सामने आया। तो वह खुद को असफल मान बैठी। परिवार के मुताबिक, रिजल्ट आने के बाद वह काफी चुप हो गई थी। बार-बार यही कह रही थी कि वह फेल हो गई है। अब आगे पढ़ाई नहीं करेगी।

अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टरों ने किया मृत्यु घोषित

रात के समय घर के बरामदे में उसने जहरीला पदार्थ खा लिया। जब उसकी भाभी ने उसे गिरते हुए देखा, तो तुरंत परिवार को बुलाया गया। आनन-फानन में उसे मोटरसाइकिल से मेडिकल कॉलेज ले जाया गया। लेकिन रास्ते में ही उसकी हालत बिगड़ती चली गई। अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

मां का रो-रो कर बुरा हाल… मृतका ने अस्पताल जाते समय भाभी से हाथ जोड़कर मांगी माफी

परिवार के लोग जब उसे अस्पताल ले जाने लगे तो रूपा ने अपनी भाभी के सामने हाथ जोड़कर माफी मांगी। यह दृश्य परिवार के दिलों में हमेशा के लिए बस गया है। रूपा के जीवन की कहानी भी संघर्षों से भरी रही। जब वह महज डेढ़ साल की थी। तभी उसके पिता का निधन हो गया था। मां का रो-रोकर बुरा हाल है। उनका कहना है कि बेटी ने उनसे कहा था कि उसे 12वीं तक पढ़ा दिया जाए। ताकि वह आगे चलकर कोई नौकरी कर सके और परिवार का सहारा बन सके। लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। पूरे मामले की जांच की जा रही है। यह घटना एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर करती है कि क्या हमारे समाज में अंक ही सफलता का पैमाना बन गए हैं।

Published on:
24 Apr 2026 01:36 pm
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