योगी आदित्यनाथ के मुख्यमन्त्री बनने के बाद लोकसभा सीट पर हिन्दू महासभा की ओर से किया था दावा
गोरखपुर। अखाड़ा परिषद ने जिस चक्रपाणि महाराज को फर्जी संत घोषित किया है वह गोरखपुर लोकसभा सीट से चुनाव लड़ना चाहते थे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा खाली की गई लोकसभा सीट पर हिन्दू महासभा की दावेदारी जताते हुए उन्होंने खुद को प्रत्याशी बनने का दावा किया था। हालांकि, उपचुनाव में वह पर्चा भरने तक नहीं पहुंचे और उनका दावा सिर्फ स्टंट निकला। बता दें कि चक्रपाणि महाराज अखिल भारतीय हिन्दू महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं। जब मुख्यमंत्री बनने के बाद योगी आदित्यनाथ ने गोरखपुर लोकसभा सीट छोड़ी थी और उपचुनाव की राह खुली तो सबसे पहले चक्रपाणि महाराज ने अपनी दावेदारी की। अक्टूबर 2017 में ही अखिल भारतीय हिन्दू महासभा के राष्ट्रीय संगठन मंत्री संजीव सक्सेना ने गोरखपुर में इसकी घोषणा की। संजीव सक्सेना ने कहा था कि गोरखपुर हमारी धरती है। हिन्दू महासभा के प्रत्याशी के रूप में यहाँ से महन्त अवेद्यनाथ सांसद व विधायक रह चुके हैं। 2002 में भी महासभा के प्रत्याशी के रूप में डॉ.राधामोहन दास अग्रवाल ने बीजेपी के पूर्व मंत्री शिव प्रताप शुक्ल को हराया था। उन्होंने कहा कि बीजेपी मंदिर के नाम पर जनता को गुमराह कर रही है। हिन्दू महासभा मंदिर बनाने के लिए कटिबद्ध है। गोरखपुर हमारी धरती है हम यह सीट अब फिर पाने के लिए मैदान में हैं।
हालाँकि, कई बार मुंहजबानी दावा के बाद जब चुनाव प्रक्रिया शुरू हुई तो वह मैदान में आना तो दूर, परचा दाखिला करने तक नहीं आये।
उपचुनाव भी खत्म लेकिन नहीं आए चक्रपाणि महराज
गोरखपुर उपचुनाव संपन्न हो चुका है। परिणाम भी सामने आ चुके हैं। समाजवादी पार्टी इस सीट पर अपने प्रत्याशी को चुनाव जीता चुकी है। सपा के प्रवीण निषाद चुनाव जीत सांसद हो चुके हैं लेकिन सीट पर हक जताने वाले चक्रपाणि महराज गोरखपुर पूरे चुनाव भर नहीं दिखे। चुनाव के घोषणा के पूर्व वह लगातार अपना दावा इस सीट पर करते रहे आैर बीजेपी पर हमला बोलते रहे।