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मरीजों के लिए बड़ी खबर, एम्स की इमरजेंसी में मिलती रहेगी खाली बेड की जानकारी…एम्स प्रशासन ने उठाया यह कदम

गोरखपुर एम्स में अब मरीजों को इमरजेंसी में भर्ती करने के लिए जद्दोजेहद नहीं करनी होगी, वहां लगी स्क्रीन अब खाली बेड की जानकारी देती रहेगी। इसके साथ ही लगभग सभी प्रमुख विभागों में डॉक्टरों की भी तैनाती हो चुकी है।

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फ़ोटो डोर्स: सोशल मीडिया, एम्स गोरखपुर

एम्स गोरखपुर की इमरजेंसी में अब बेड के लिए बहानेबाजी नहीं चलेगी। एम्स प्रशासन ने इमरजेंसी में एलईडी स्क्रीन लगाने का निर्णय लिया है, इससे सबसे बड़ा फायदा मरीज के परिजन को होगा और उसे यह मालूम हो जाएगा कि कितना बेड खाली है। पूछताछ काउंटर पर लगी एलईडी स्क्रीन को इमरजेंसी में स्थापित कराया जा रहा है। इस स्क्रीन पर इमरजेंसी में बेड की उपलब्धता की सूचना लगातार अपडेट होगी।

एम्स की इमरजेंसी में चल रही थी मनमानी

बता दें कि एम्स की इमरजेंसी में अव्यवस्था और तीन महीने तक रोगियों को रोककर उनके इलाज की खबरें आ रही थीं, इसको संज्ञान में लेते हुए लंबे समय से इमरजेंसी में भर्ती रोगियों को संबंधित वार्डों में रेफर कर दिया गया। एक महिला रोगी की तबीयत ठीक थी तो उन्हें डिस्चार्ज कर दिया गया। कार्यकारी निदेशक ने खुद एम्स की इमरजेंसी का निरीक्षण किया और व्यवस्था की जानकारी ली।

गोरखपुर एम्स की इमरजेंसी में हैं 60 बेड

एम्स गोरखपुर की की इमरजेंसी में 60 बेड हैं। इनमें से 22 बेड ट्रायज के लिए आरक्षित हैं। इन बेड पर इमरजेंसी में तत्काल आने वाले रोगियों को उनकी स्थिति के अनुसार भर्ती किया जाता है। यहां उपचार के बाद रोगी की हालत स्थिर होती है तो उसे इमरजेंसी की आइपीडी में भर्ती कर दिया जाता है।

इमरजेंसी में उपचार की प्रक्रिया पूरी होने के बाद रोगी को संबंधित विभाग में रेफर करना होता है लेकिन ऐसा किया नहीं जा रहा था। इस कारण इमरजेंसी की आइपीडी हमेशा भरी बताई जाती थी। इसका आधार लेकर रोगियों को रेफर कर दिया जाता था। अब नई व्यवस्था बनने से इमरजेंसी में आए रोगियों को भर्ती करने में बहानेबाजी नहीं चलेगी।

प्रमुख विभागों में डॉक्टर की हो चुकी है तैनाती

एम्स में नेफ्रोलाजिस्ट को छोड़कर सभी प्रमुख विभागों में विशेष डाक्टरों की तैनाती हो चुकी है। इमरजेंसी में भी डाक्टरों की पर्याप्त संख्या है। निर्देश है कि जरूरत पड़ने पर डाक्टर को फोन कर इमरजेंसी में बुलाया जाए और रोगी का परीक्षण कर उपचार किया जाए। लेकिन ज्यादातर मामलों में संबंधित डाक्टर को फोन भी नहीं किया जाता। इससे रोगी का सही उपचार नहीं हो पाता है।