शहर की बढ़ती आबादी को देखते हुए, आवासीय जरूरतों को पूरा करने के लिए नया गोरखपुर बसाने की प्रक्रिया तेज हो चुकी है। जिले में करीब 7 साल से सर्किल रेट नहीं बढ़ा है जबकि बाजार मूल्य तेजी से बढ़ा।
22 फरवरी को प्रदेश सरकार की ओर से प्रस्तुत किए गए बजट में नए शहरों के लिए बजट का प्रविधान भी हो चुका है।
इसके लिए 60 गावों को किया गया चिन्हित
शहर के बाहरी क्षेत्र में 60 गांवों को इसके लिए चिह्नित कर लिया गया है, लेकिन इन गांवों में जमीन अधिग्रहण के लिए मुआवजे की चुनौती से जूझना होगा। सर्किल रेट की तुलना में शहर के बाहरी क्षेत्र में जमीन का मूल्य कई गुना अधिक है।
43 लाख रुपये से लेकर 85 लाख रुपये तक कीमत निर्धारित
प्रशासन की ओर से गांवों में सर्वे का काम शुरू भी करा दिया गया है। शहर के उत्तर दिशा में नया गोरखपुर के लिए गोरखपुर-टिकरिया-महराजगंज रोड पर 12 गांवों में सर्वे का काम शुरू करा दिया गया है।
इन गांवों में प्रति हेक्टेयर दर भी निर्धारित की गई है। किसानों से बातचीत के आधार पर ही जमीन लेने का प्रविधान है, लेकिन सर्वे शुरू होते ही किसानों में जमीन के मूल्य को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। अलग-अलग गांवों में 43 लाख रुपये से लेकर 85 लाख रुपये तक कीमत निर्धारित की गई है।
कुछ गांव शहर से हैं सटे
इसमें कुछ गांव शहर से पूरी तरह से सटे हैं। यहां बाजार मूल्य अधिक है। कुसम्ही से पिपराइच मार्ग के कुछ गांवों को भी इस परियोजना में शामिल करने की चर्चा है। यहां के निवासियों का कहना है कि प्रशासन की ओर से निर्धारित दर की तुलना में बाजार मूल्य तीन गुना से अधिक है।
किसान जमीन देने को तैयार नहीं
यहां के लोगों का कहना है कि फोरलेन बाईपास के लिए अपेक्षाकृत कम जमीन देनी थी इसलिए यहां के किसान तैयार हो गए, लेकिन नए शहर के लिए अधिक जमीन ली जाएगी। इसलिए किसान आसानी से तैयार नहीं होंगे।
6 माह के बैेनामा को रेट के लिए बनाया जाएगा आधार
सामान्य तौर पर नगरीय क्षेत्र में सर्किल रेट के अधिकतम दो गुना , जबकि ग्रामीण क्षेत्र में अधिकतम चार गुना मुआवजा देने का प्रविधान है। बातचीत में यदि किसान सहमत नहीं हुए तो कई बार पिछले छह महीने के बैनामे को भी इसका आधार बनाया जाता है।
इसी तरह मुआवजे से असंतुष्ट किसान जिला मजिस्ट्रेट के यहां वाद भी दाखिल कर सकते हैं। यहां से भी फैसला किया जाता है।