गोरखपुर में रहने वाली एक रिटायर्ड महिला डॉक्टर को साइबर ठगों ने खुद को ईडी का अधिकारी बन झांसे में लिया। वह जालसाजों के इशारे पर काम करने लगी। इस तरह 8 दिन तक वह डिजिटल अरेस्ट रहीं। जालसाजों ने डराकर जांच के नाम पर उनसे 1.58 करोड़ रुपये अपने खाते में जमा करा लिए।
गोरखपुर में एक रिटायर्ड महिला डॉक्टर को साइबर ठगों ने मनी लॉन्ड्रिंग के झांसे में फंसाकर करीब 1 करोड़ 58 लाख रुपये की ठगी कर ली। पीड़िता की तहरीर पर साइबर थाना गोरखपुर में मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।
जानकारी के मुताबिक पीड़िता डॉ. मंजुला श्रीवास्तव, पत्नी स्व. शैलेष कुमार श्रीवास्तव, निवासी सी-178/78, 5 कैनाल रोड, थाना कैंट, गोरखपुर ने बताया कि 13 फरवरी 2026 को एक अज्ञात व्यक्ति ने व्हाट्सएप वीडियो कॉल कर खुद को ईडी का अधिकारी बताया।
कॉलर ने कथित तौर पर केनरा बैंक में 50 लाख रुपये के लेन-देन और मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप लगाते हुए उन्हें अदब में ले लिया। साइबर ठगों ने पीड़िता को लगातार निगरानी में रखने, किसी से बात न करने और घर से बाहर न निकलने का दबाव बनाया। बताया गया कि सारा पैसा रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया में जांच के लिए जा रहा है, जांच पूरी होने पर वापस आ जाएगा।
पीड़िता ने 13 से 21 फरवरी 2026 के बीच सारी एफडी तुड़वाकर अलग-अलग खातों में रकम ट्रांसफर करा ली। 18 फरवरी 26 को यूनियन बैंक खाते से 30 लाख रुपये ICICI बैंक खाते में RTGS की। 20 फरवरी 26 को 80 लाख रुपये ICICI बैंक खाते में RTGS की।
21 फरवरी 26 को SBI खाते से 47,99,952.80 रुपये ICICI बैंक खाते में RTGS किया की। ऐसे ही मिलाकर कुल मिलाकर 1,57,99,952.80 रुपये की ठगी की गई। ठगों ने ईडी की फर्जी रसीदें भेजीं, जिन पर एक-सा नंबर था। कॉलर खुद को पुणे से बात करने वाला बताता रहा और “24 फरवरी तक पैसा लौटने” का भरोसा देता रहा। बाद में कम्युनिकेशन ब्लॉक हो गया।
साइबर थाना गोरखपुर में अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। मामले की जांच निरीक्षक कपिल देव चौधरी को सौंपी गई है। पुलिस का कहना है कि ट्रांजेक्शन ट्रेल, कॉल डिटेल्स और खातों की जांच कर रकम रिकवर करने के प्रयास किए जा रहे हैं।