गोरखपुर

डीडीयू में 4- 5 नवम्बर को आयोजित होगा संगोष्ठी, शिक्षक से लेकर शिक्षार्थी तक कसौटी पर परखे जायेंगे

दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी भारतीय उच्च शिक्षा: यथार्थ एवं आकांक्षाएं में कई विश्वविद्यालयों की सहभागिता होने जा रही है।

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डीडीयू

गोरखपुर. शैक्षिक महासंघ तथा दर्शनशास्त्र विभाग, दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय, गोरखपुर के संयुक्त आयोजन में दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी भारतीय उच्च शिक्षा: यथार्थ एवं आकांक्षाएं में कई विश्वविद्यालयों की सहभागिता होने जा रही है। संगोष्ठी में पाठ्यक्रम से लेकर परीक्षा प्रणाली, कक्षा में पठन-पाठन से लेकर पाठ्येत्तर सहगामी प्रक्रियाओं तक, शिक्षार्थी से लेकर शोधार्थी तक तथा उच्च शिक्षा के प्रत्येक महत्वपूर्ण घटक पर मंथन किया जायेगा। आयोजन 4 व 5 नवम्बर को किया गया है।

उद्घाटन मुख्यअतिथि डॉ.महेश चंद्र शर्मा करेंगे। अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के उच्च शिक्षा संवर्ग के प्रभारी महेन्द्र कुमार तथा शैक्षिक महासंघ की स्थानीय विश्वविद्यालय इकाई के अध्यक्ष प्रो. विजय कुमार तथा मन्त्री डाॅ. आमोद कुमार राय ने बताया कि संगठन अपने ध्येय वाक्य के अनुरुप ‘‘राष्ट्र के हित में शिक्षा, शिक्षा के हित में शिक्षक एवं शिक्षक के हित में समाज’’ ही इस आयोजन को गंभीरता से सम्पादित कराने हेतु कृतसंकल्पित हैं। शिक्षा के ही चरित्र को अपने उच्चतम स्तर तक बनाया जा सकता है। इसका आरम्भ हमारे यहाँ प्राथमिक शिक्षा के स्तर पर तो जोर-शोर से किया जाता है, किन्तु उच्च शिक्षा तक आते-आते यह क्षीण होता हुआ दिखने लगता है। जो शिक्षा चरित्र निर्माण न कर सके उसका कोई मूल्य नहीं है और इसका प्रतिफल आसानी से आज परिलक्षित हो रहा है।

आयोजनकर्ताओं ने बताया कि दीनदयाल उपाध्याय जी ने भी कहा था कि ‘‘शिक्षा का संबंध जितना व्यक्ति से है, उससे अधिक समाज से है। हम ऐसे मानव की कल्पना कर सकते हैं जिसे किसी भी प्रकार की शिक्षा न मिली हो और जो अपनी सहज प्रवृत्तियों के सहारे ही जीवनयापन करता हो, किन्तु बिना शिक्षा के समाज संभव नहीं।’’ उच्च शिक्षा को समाजोपयोगी एवं राष्ट्रीय स्वरुप की बेहतरी के लिए ढालने की संदिच्छा से इस गोष्ठी का आयोजन किया जा रहा है। इस संगोष्ठी में विश्वविद्यालय से सम्बद्ध सभी महाविद्यालयों (अशासकीय एवं स्ववित्तपोषित) को तथा शोधार्थियों को आमन्त्रित किया गया है। उच्च शिक्षा के दो सबसे महत्वपूर्ण घटकों तथा पाठ्यक्रम तथा शिक्षक शिक्षार्थी अनुपात पर विशेष तकनीकी सत्र आयोजित किया जायेगा। बताया कि प्रो. रविशंकर सिंह, प्रो. विनोद कुमार सिंह, प्रो. विजयशंकर वर्मा तथा प्रो. डीएन यादव संगोष्ठी के आयोजन में महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन कर रहे हैं।

By- Dheerendra Gopal

Published on:
03 Nov 2017 08:40 am
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