भक्तों  की हर मुराद पूरी करती है मां, दर्शन को उमड़ती है भीड़

एक मान्यता के अनुसार छह सौ साल पहले मुगल काल में खलीलुर्रहमान ने स्थापित कराई थी मूर्ति
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Oct 08, 2016
navratra
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गोरखपुर/ संतकबीरनगर. खलीलाबाद में स्थित समय जी का मंदिर जिले के लोगों के लिए आस्था और श्रद्धा का सबसे बड़ा केंद्र हैं। माना जाता है कि देवी के इस मंदिर में श्रद्धालुओं की सभी मुरादें पूरी होती हैं। प्राचीन काल का यह मंदिर अपने जीर्णोद्धार के पश्चात अब भव्य रूप में लोगों को अपनी ओर आकर्षित कर रहा है।

मंदिर की प्राचीनता और स्थापना को लेकर हैं अलग अलग मत
लोकमान्यता के अनुसार देवी की प्रतिमा दूध की धार के साथ सिद्धार्थनगर जिले के नेपाली सरहद पर बसे क्षेत्र बढ़नी से लाई जा रही थी। जिसे कहीं स्थापित किया जाना था । लेकिन दूध की धार यहां तक आते-आते समाप्त हो गई तो इसे अन्य स्थान पर ले जाना संभव नहीं हो सका। तब देवी मां की प्रतिमा को खलीलाबाद के मौजूदा स्थान पर स्थापित कर दिया गया। तभी से श्रद्धालुओं की आस्था इस मंदिर के प्रति बढ़ गई।

जबकि एक अन्य मान्यता के अनुसार छह सौ साल पहले मुगल काल में खलीलुर्रहमान ने खलीलाबाद नगर को बसाया था, वे अपने किले के पास माता जी की प्रतिमा स्थापित करना चाहते थे। इस तरह माता की प्रतिमा यहां पर स्थापित कर दी गईं। समय के साथ खलीलाबाद की आबादी बढ़ती गई और यह कस्बे के रूप में विकसित होता गया।

इस मंदिर को सद्भाव के प्रतीक रूप में भी देखा जाता है। समय माता की प्रतिमा का पूजन-अर्चन तभी से प्रारंभ हो गया और इसे मंदिर का रूप दे दिया गया। लोगों की आस्था दिन-प्रतिदिन इस मंदिर के प्रति और प्रगाढ़ होती गई। श्रद्धालुओं की मनौती पूरी होने लगी।जनसहयोग से इस मंदिर का जीर्णोद्धार कर इसे भव्यरूप दिया गया है। जनपद वासियो की यहाँ अटूट श्रद्धा के कारण साल भर यहां पूजा-पाठ, कथा, मुंडन, शादी आदि मांगलिक कार्य होते रहते हैं।

इस मंदिर में होने वाली सुबह-शाम मां की आरती दर्शनीय होती है। जिले के आसपास के क्षेत्रों के श्रद्धालुओं की भीड़ समय माता के दर्शन के लिए लगी रहती है। मंदिर के पुजारी का कहना है कि श्रद्धा से जो भी यहां आता है। समय माता की कृपा उस पर बनी रहती है। भक्तों की मुरादें पूरी होती हैं। इस दरबार से कोई खाली नहीं जाता।
Published on:
08 Oct 2016 08:35 am