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कैंसर सेल्स का खात्मा करेगी ‘ध्वनि तरंगें’! अल्ट्रासाउंड से होगा बीमारी पर प्रहार

कैंसर सेल्स के खात्मे के लिए अब एक नई उम्मीद सामने आई है। क्या है वैज्ञानिकों की नई खोज? आइए जानते हैं।
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भारत

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Tanay Mishra

Jul 04, 2026

Sound waves to possibly destroy cancer cells

कैंसर सेल्स का खात्मा करेगी 'ध्वनि तरंगें'! (Representational Photo)

भारत (India) दुनिया में मुंह के कैंसर (Cancer) के सबसे बड़े बोझ वाले देशों में शामिल है। गुटखा, तम्बाकू की लत से इस बीमारी के कई मामले सामने आते हैं। हालांकि अब इस बीमारी के इलाज में एक नई उम्मीद सामने आई है। इंडियन इंस्टीटयूट ऑफ साइंस और एमएस रमैया मेडिकल कॉलेज के वैज्ञानिकों ने पाया है कि कम आवृत्ति वाली ध्वनि तरंगों के अल्ट्रासाउंड से कैंसर सेल्स को चुनिंदा रूप से नष्ट किया जा सकता है। वैज्ञानिकों ने यह भी पाया कि ऐसा करने से आसपास की स्वस्थ कोशिकाओं को नुकसान नहीं पहुंचाता।

बढ़ सकती है सफलता की दर

वैज्ञानिक अभी इस खोज पर और परीक्षण करेंगे और उन परीक्षणों के नतीजों के आधार पर आगे की रिसर्च करेंगे। अगर आगे के परीक्षण सफल रहे, तो यह तकनीक भविष्य में कैंसर के गैर-आक्रामक (नॉन-इनवेसिव) इलाज का नया रास्ता खोल देगी। इससे अन्य इलाजों के साथ मिलकर सफलता की दर बढ़ सकती है। ऐसा होने पर सिर्फ भारत में ही नहीं, दुनियाभर में कैंसर के इलाज के लिए यह एक असरदार इलाज हो सकता है। मेडिकल साइंस में यह एक प्रभावी खोज बनकर उभर सकती है।

ध्वनि तरंगों का दबाव नहीं झेल पाएं कैंसर सेल्स

वैज्ञानिकों ने मरीजों से प्राप्त मुंह के ट्यूमर सैम्पल्स पर रिसर्च की। उन्होंने पाया कि कैंसर सेल्स में ट्रोपोमायोसिन 2.1 नाम के प्रोटीन का स्तर कम होता है। यही प्रोटीन सामान्य कोशिकाओं को बाहरी दबाव और यांत्रिक बलों को सहने में मदद करता है। जब इन कोशिकाओं पर अल्ट्रासाउंड ध्वनि तरंगें डाली गईं, तो कैंसर सेल्स दबाव सहन नहीं कर पाएं और नष्ट हो गए, जबकि स्वस्थ कोशिकाएं सुरक्षित रहीं।

सिर्फ मारता नहीं, फैलाव भी रोकता है

वैज्ञानिकों की इस रिसर्च में एक और महत्वपूर्ण बात सामने आई। अल्ट्रासाउंड के इस्तेमाल से ध्वनि तरगों की मदद से न सिर्फ कैंसर सेल्स को खत्म किया जाता है, बल्कि इन सेल्स के आसपास के ऊतकों में फैलने और घुसपैठ करने की क्षमता को भी काफी हद तक कम कर दिया जाता है। यह तकनीक ट्यूमर के चारों ओर बनी उस सुरक्षात्मक परत को भी कमजोर कर देती है, जो अक्सर दवाओं और शरीर की प्रतिरक्षा कोशिकाओं को ट्यूमर तक पहुंचने से रोकती है।