गोरखपुर में पुलिस और स्वयं सेवी संस्थाओं के लगातार जागरूक करने के बाद भी लोग साइबर जालसाजों के धोखे का शिकार हो जा रहे हैं। इस बार हिंदुस्तान लौटा एक NRI आठ लाख से अधिक की ठगी का शिकार हो गया।
गोरखपुर में साइबर जालसाजों ने इस बार विदेश से लौटे NRI को जालसाजी में फंसा कर आठ लाख से अधिक रुपए ऐंठ लिए। पीड़ित बरनार्ड पाल निवासी जटेपुर दक्षिणी धर्मशाला बाजार, थाना गोरखनाथ ने बताया किकुछ दिन पहले वह ऑस्ट्रिया से लौटे हैं, एक दिन जालसाज ने अकाउंट खोलने के नाम पर जालसाजी का शिकार बना लिया।इसके बाद एपीके (एंड्रॉयड एप्लिकेशन पैकेज या सिंपल एंड्रॉयड पैकेज) फाइल डाउनलोड कराकर दो बैंक का पूरा डिटेल लेकर रुपये दूसरे बैंक खाते में ट्रांसफर कर लिए। बृहस्पतिवार को साइबर थाने में केस दर्ज कर पुलिस जांच पड़ताल में जुटी है। पीड़ित का एचडीएफसी बैंक और एयू स्माल फाइनेंस बैंक में एनआरआई खाता हैं।
11 दिसंबर 2024 को मोबाइल पर एक कॉल आई। जालसाज ने खुद को मेडिकल कॉलेज शाखा का आरबीएल बैंक का मैनेजर बताया। उसने आरबीएल बैंक में खाता खोलने की बात कही। बातचीत के दौरान उसने एक ऑनलाइन फॉर्म भरने को लिए कहा। इसमें उसने अन्य खाते का विवरण (एचडीएफसी, एयू स्माल फाइनेंस बैंक) भरवाया।
जालसाज ने इसके बाद मोबाइल पर एक एपीके फाइल डाउनलोड कराया। इसके बाद मोबाइल को अपने नियंत्रण में लेकर नेट बैंकिंग से एयू स्माल फाइनेंस बैंक से 07 लाख 60 हजार 494 रुपये तथा एचडीएफसी बैंक से 84 हजार 290 रुपये विभिन्न खातों में भेज दिए।जालसाजी के दौरान जालसाज ने एक मारुति कार का इंश्योरेंस के भुगतान का प्रयास किया। भुगतान का लिंक मारुति बीमा कंपनी की ओर से ई-मेल भेजा गया था। जब यह मेल देखा तब ठगी की जानकारी हुई। इसके बाद 22 जनवरी 2025 को साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत की। बृहस्पतिवार को साइबर थाने में केस दर्ज कर लिया गया।SP सिटी अभिनव त्यागी ने बताया कि साइबर ठग APK फाइल के जरिए मोबाइल का पूरा डेटा एक्सेस कर लेते हैं। वे ई-सिम एक्टिवेट कर नंबर से जुड़े बैंक खाते में ई-मेल लिंक कर यूपीआई के जरिए पैसे निकाल लेते हैं। इससे बचें।