देवरिया जिले के भाटपार रानी की रहने वाली युवती पूजा को दो दिन पूर्व अचानक सांस लेने में तकलीफ शुरू हुई। परिजन उसे लेकर AIIMS पहुंचे। पिता उमाकांत ने बताया कि साढ़े तीन घंटे के इंतजार के बाद किसी तरह मेडिसिन विभाग के इमरजेंसी वार्ड में इलाज शुरू हुआ।
एम्स गोरखपुर की इमरजेंसी से शनिवार रात मरीज के साथ जो घटना हुई वो इंसानियत शर्मसार कर दी। घंटों इंतजार के बाद खानापूर्ति कर डिस्चार्ज करने के बाद युवती की उपचार के लिए ले जाते समय एंबुलेंस में ही मृत्यु हो गई। परिवार में कोहराम मचा हुआ है। लाचार पिता ने फिलहाल इसकी शिकायत ऊंचे स्तर तक किए जाने की बात कही है। इधर एम्स प्रशासन ने उपचार में किसी भी तरह की लापरवाही से इन्कार किया है। मीडिया सेल की चेयरमैन डा. आराधना सिंह ने कहा कि मेडिसिन आइसीयू में बेड न होने की जानकारी देकर युवती को शनिवार शाम छह बजे रेफर कर दिया गया था। इसके बाद भी घर वाले उसे लेकर नहीं गए। युवती दुर्लभ रोग गुलियन बेरी सिंड्रोम (GBS) से पीड़ित थी।
देवरिया जिले के भाटपाररानी की 22 वर्षीय पूजा को तीन दिन पहले सांस लेने में दिक्कत हुई थी। थोड़ी देर बाद उसके शरीर ने काम करना बंद कर दिया। पिता उमाकांत प्रजापति ने बताया कि देवरिया के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ।शनिवार सुबह बेटी को लेकर एम्स की इमरजेंसी में आया।
यहां कई बार मनोव्वल के बाद डाक्टरों ने शाम तकरीबन चार बजे बेटी को भर्ती किया। तब तक हालत और बिगड़ चुकी थी। डाक्टरों ने बेटी का कोई उपचार नहीं किया। जो भी डाक्टर आते थे, पर्चा में कुछ लिखकर चले जाते थे। उपचार के नाम पर ग्लूकोज की बोतल चढ़ा दी गई थी। बेटी की हालत में कोई सुधार नहीं हुआ और शाम छह बजे हायर सेंटर ले जाने की बात कहते हुए बाहर कर दिया गया।
पिता ने जब एंबुलेंस की मांग की उस पर भी किसी ने ध्यान नहीं दिया जबकि एम्स प्रशासन को दो एंबुलेंस मिली हैं और दोनों उस दौरान खड़ी थीं।इसके बाद पुलिस को सूचना दी। पुलिसकर्मियों को भी इमरजेंसी में नहीं जाने दिया जा रहा था। किसी तरह दोबारा अंदर किया गया लेकिन दस मिनट में फिर बाहर कर दिया गया। किसी तरह बाहर निकलकर एंबुलेंस किया और बिटिया को लेकर निकला पर रास्ते में ही उसका निधन हो गया।