दिल्ली-एनसीआर में डीजल जनरेटरों से होने वाले प्रदूषण को रोकने के लिए लगाए जा रहे रेट्रोफिट एमिशन कंट्रोल डिवाइस (RECD) में बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है। DPCC के टेस्ट में कई प्रमाणित डिवाइस फेल पाए गए हैं, जिसके बाद CAQM ने सख्त रुख अपनाते हुए CPCB को नई SOP बनाने और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।

डीजल जनरेटर (DG) सेटों से होने वाले प्रदूषण को कम करने के लिए लगाए जाने वाले रेट्रोफिट एमिशन कंट्रोल डिवाइस (RECD) को वायु प्रदूषण नियंत्रण की एक महत्वपूर्ण पहल माना जाता है। ये उपकरण कणीय प्रदूषण (PM) में 70 प्रतिशत तक कमी लाने में सक्षम हैं और राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (NCAP) के लक्ष्यों को हासिल करने में मदद कर सकते हैं।
हालांकि, हाल के दिनों में बाजार में फर्जी और गैर-मानक RECD की बिक्री को लेकर गंभीर सवाल उठे हैं। वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) को भेजे पत्र में दिल्ली-एनसीआर में गैर-अनुपालक RECD लगाए जाने की समस्या पर चिंता जताई है।
वहीं दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (DPCC) द्वारा किए गए परीक्षणों में Vasthi, Platino, Automoto और Pi Green के कुछ RECD, जो कागजों पर CPCB प्रमाणित थे, निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं पाए गए।
विशेषज्ञों का कहना है कि उद्योगों, व्यावसायिक संस्थानों और आवासीय सोसायटियों के लिए असली और नकली RECD की पहचान करना आसान नहीं है। इससे कई उपभोक्ता अनजाने में ऐसे उपकरण लगा लेते हैं जो अपेक्षित प्रदूषण नियंत्रण नहीं कर पाते।
CAQM ने CPCB को RECD के परीक्षण और सत्यापन के लिए मजबूत स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) बनाने की सलाह दी है। साथ ही CPCB, DPCC और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों से स्वीकृत RECD निर्माताओं की सूची सार्वजनिक करने, नियमित निरीक्षण कराने और गैर-अनुपालक कंपनियों पर सख्त कार्रवाई करने की मांग की गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि RECD नीति प्रभावी है, लेकिन इसकी सफलता सख्त निगरानी, पारदर्शिता और प्रभावी क्रियान्वयन पर निर्भर करेगी। केवल प्रमाणित और उच्च गुणवत्ता वाले RECD के उपयोग से ही वायु प्रदूषण नियंत्रण के लक्ष्य हासिल किए जा सकते हैं।