विद्रोही लड़ाके पूर्वी घोउटा को छोड़कर वापस जाने लगे हैं। अब आम नागरिकों का जीवन स्तर पटरी पर लौटने लगी है।
नई दिल्ली । अमरीका ने सीरिया से अपनी सेना को वापस बुलाने की घोषणा कर दी है, जिसके बाद सीरिया के पूर्वी घोउटा को लेकर सरकार और विद्रोही लड़ाकों के बीच ऐतिहासिक समझौता हुआ है। इस समझौते के बाद सीरिया में गोले और बंदूकों की आवाजें थम गई है। विद्रोही लड़ाके पूर्वी घोउटा को छोड़कर वापस जाने लगे हैं। अब आम नागरिकों का जीवन स्तर पटरी पर लौटने लगी है।
सरकार और लड़ाकों के बीच ऐतिहासिक समझौता
गौरतलब है कि सीरिया में विद्रोही लड़ाकों और सरकार के बीच एक समझौता हुआ है। इससे सीरिया की सरकार द्वारा दमिश्क के नजदीक स्थित इस क्षेत्र को अपने कब्जे में लेने का रास्ता भी साफ हो गया है। इस समझौते के बाद बसों में भरकर विद्रोही लड़ाके पूर्वी घोउटा से बाहर जाने लगे हैं। कुछ वर्षों से सीरिया के हालात बिल्कुल नर्क के समान हो गया था। लड़ाकों और सरकार के बीच लगातार टकराव के कारण आम नागरिकों का जीवन दुभर हो गया था।
गौरतलब है कि सरकार और लड़ाकों के बीच यह समझौता रूस की मध्यस्थता से हुई है। इसके तहत जैश अल इस्लाम के लड़ाके डाउमा शहर को छोड़ कर वापस चले जाएंगे।
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समझौते के बाद सीरिया में जगी शांति की उम्मीद
आपको बता दें कि बीते एक सप्ताह में विश्व पटल पर सीरिया को लेकर राजनीतिक, कूटनीतिक और रणनीतिक हालात जिस तरह से बदलें है उससे यह आशा जगी है कि भविष्य में बेहतर स्थिति उत्पन्न होगी। बता दें कि अमरीका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमरीकी सेना को सीरिया से वापस बुलाने का फैसला लिया है। इस फैसले के बाद सीरिया में शांति की उम्मीद की जा रही है। साथ ही सरकार और लड़ाकों के बीच हुए समझौते ने भी शांति की एक उम्मीद जगाई है। हालांकि इससे पूर्व लड़ाकों और सरकार के बीच झड़प में हर रोज आम नागरिक मारे जाते थे। हर दिन किसी न किसी क्षेत्र में एक रॉकेट लॉंचर गिरता था। लेकिन अब शांति का माहौल बनने लगा है।
आपको बता दें कि सीरिया के राष्ट्रपति बशर अल असद ने 18 मार्च को पूर्वी घोउटा का दौरा किया था। इस दौरे के दौरान जवानों से मुलाकात की थी और इस मुहिम में जुड़ने के लिए उनका आभार व्यक्त किया।