
Donald Trump (Photo - Washington Post)
ईरान (Iran) और अमेरिका (United States of America) के बीच सीज़फायर के खत्म होने के कुछ घंटे पहले ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने इसे बढ़ाने की घोषणा कर दी। ट्रंप ने ईरान की सरकार में अंदरूनी विभाजन बताते हुए ईरान को एकजुट प्रस्ताव बनाने के लिए और समय देने के लिए सीज़फायर को बढ़ाने का फैसला लिया। सीज़फायर तब तक जारी रहेगा जब तक दोनों पक्षों के बीच समझौता नहीं हो जाता। हालांकि ट्रंप का यह फैसला हैरान करने वाला है, क्योंकि ईरान के खिलाफ पहली बार सीज़फायर लागू करने के बाद ट्रंप ने साफ कर दिया था कि इसे बढ़ाया नहीं जाएगा।
शुरुआत से ही ईरान के प्रति आक्रामक रुख रखने वाले ट्रंप अब बैकफुट पर नज़र आ रहे हैं। जो ट्रंप पहले ईरान को धमकियाँ देते नहीं थक रहे थे, अब वह जल्द से जल्द युद्ध को खत्म करने के लिए बेताब नज़र आ रहे हैं। इसी वजह से ईरान की तरफ से बातचीत में शामिल न होने वाले रवैये के बावजूद ट्रंप शांति-वार्ता पर जोर दे रहे हैं और जल्द से जल्द दोनों देशों के बीच स्थायी समझौते को ज़रूरी बता रहे हैं।
1. हथियारों की कमी
ईरान-अमेरिका और इज़रायल युद्ध करीब 40 दिन तक चला। इस दौरान अमेरिका और इज़रायल ने ईरान पर ताबड़तोड़ हमले किए। ईरान को तबाह करने के लिए अमेरिका ने जमकर अपने हथियारों का इस्तेमाल किया। इस युद्ध की वजह से हर दिन अमेरिका को करीब 1 बिलियन डॉलर का नुकसान हुआ। ईरान के खिलाफ इज़रायल ने जिन हथियारों का इस्तेमाल किया, उनमें से अधिकांश हथियार अमेरिका ने ही सप्लाई किए थे। लंबे चले युद्ध के कारण अब अमेरिका के पास हथियारों की कमी हो गई है, जो चिंता का विषय है। हथियारों के लिए फंडिंग को बढ़ाने पर भी संसद में सहमति नहीं बन रही है। सेंटर फॉर स्ट्रैटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज़ (CSIS) की रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका अपने एडवांस हथियारों का एक बड़ा हिस्सा इस युद्ध में खत्म कर चुका है और अगर युद्ध फिर से शुरू हुआ, तो अमेरिका के सामने गंभीर समस्या खड़ी हो सकती है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि हथियारों का स्टॉक पहले जितना करने में अमेरिका को 3-5 साल लग सकते हैं और ऐसा करने में पानी की तरह पैसा बहाना पड़ेगा।
2. अप्रूवल रेटिंग में गिरावट
युद्ध की वजह से ट्रंप की अप्रूवल रेटिंग में भी गिरावट देखने को मिली है। ट्रंप की अप्रूवल रेटिंग करीब 35% पहुंच गई है जो काफी कम है। ट्रंप ने राष्ट्रपति बनने से पहले वादा किया था कि वह अमेरिका को किसी भी युद्ध में नहीं धकेलेंगे, लेकिन उन्होंने अपना वादा तोड़ दिया है, जिससे अमेरिकी जनता नाराज़ है। ईरान के खिलाफ युद्ध से अमेरिका में महंगाई भी बढ़ गई है, तेल-गैस की कीमतों में काफी इजाफा हुआ है, जिससे जनता की जेब पर मार पड़ रही है और लोगों की नाराज़गी बढ़ती जा रही है।
3. मिडटर्म चुनाव
अमेरिका में इस साल नवंबर में मिडटर्म चुनाव होने वाले हैं। युद्ध की वजह से देश की आबादी का एक बड़ा हिस्सा ट्रंप से नाराज़ है और इसी वजह से विपक्षी डेमोक्रेटिक पार्टी को मिडटर्म चुनाव में फायदा होना तय माना जा रहा है और ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी को झटका लगने की उम्मीद जताई जा रही है।
Updated on:
22 Apr 2026 10:07 am
Published on:
22 Apr 2026 09:35 am
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