गुना

यहां अफसर नहीं आए तो बाबू भी चले गए कहीं! भगवान भरोसे चल रहा ये विभाग

धूल खा रही दिव्यांगों की ट्राइसिकिल, कार्यालय के अंदर खड़े होते हैं वाहन।

3 min read
Mar 10, 2018

गुना। जिला शिक्षा कार्यालय में इन दिनों अराजकता और अव्यवस्था का बोल-बाला है। इन दिनों यहां ये स्थिति बन गई है कि कार्यालयीन समय में भी यहां न तो अफसर नजर आते हैं और न ही बाबू।

कार्यालय के ही एक व्यक्ति ने नाम न बताने की शर्त पर कहा कि कार्रवाई के डर से कार्यालय तो समय पर खुलता है, यहां आपको पंखा चलता हुआ भी नजर आएगा, लेकिन बाबुओं और अफसरों की कुर्सियां खाली ही मिलेंगी।

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जिसके चलते यहां शिकायत लेकर आए लोगों को अधिकारी-बाबुओं के न मिलने पर निराश होकर लौटना पड़ रहा है।

खास बात तो ये है कि यहां दीवारों पर धूम्रपान वर्जित है लिखा होने के बावजूद यहां तम्बाकू के पीकदान जगह-जगह देखे जा सकते हैं।

जानकारों का कहना है ऐसे लगता है जैसे यहां शिक्षा विभाग का चाहें जिला शिक्षा कार्यालय हो, डीपीसी या बीआरसी के कार्यालय हों, सब भगवान भरोसे चल रहे हैं। जबकि डीपीसी का मामला तो विधानसभा तक पहुंच गया है।

इस संबंध में पत्रिका टीम ने जब शिक्षा विभाग के डीईओ, बीईओ, बीआरसी और डीपीसी व जिला प्रौढ़ शिक्षा अधिकारी कार्यालय का भ्रमण किया तो वहां के हालात बेहद खराब देखने को मिले। वहीं बीआरसी कार्यालय में तो यह स्थिति देखने को मिली कि वहां चारों कुर्सियां खाली थीं और दोनों पंखें फुल स्पीड में चलते दिखाई दिए।

आंखों देखी...
जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय
समय: दोपहर 12.36 बजे
ये मिली स्थिति- जिला शिक्षा अधिकारी का कक्ष बाहर से बंद मिला। उनके बगल वाले कक्ष में दो लोग बैठे हुए मिले। दूसरी तरफ बने कक्ष में मात्र एक बाबू कम्प्यूटर पर काम करता मिला। उनके कक्ष की तीनों कुर्सियां खाली पड़ी थीं। इसके साथ ही दूसरे कक्षों में दो से तीन कुर्सियां भी खाली दिखाई दीं। एक कक्ष में कुछ बाबू बैठकर आपस में बतियाते नजर आए। जब एक बाबू से दूसरे बाबूओं के बारे में जानकारी ली तो बताया गया कि सब परीक्षाओं में गए हैं। उनसे पूछा गया कि परीक्षा में बाबुओं की भी क्या ड्यूटी लगी है, जब उन्होंने कहा कि यहां तो ऐसा ही राम राज्य चल रहा है। परीक्षा के नाम पर पूरे-पूरे दिन गायब रहते हैं। यहां दो-तीन लोग अपने काम से जिला शिक्षा अधिकारी के आने का बेसब्री से इंतजार करते देखे गए।

बीआरसी कार्यालय
समय: दोपहर 12.40बजे
ये मिली स्थिति- जिला शिक्षा कार्यालय परिसर में बने बीआरसी कार्यालय में यह आलम था कि वहां चारों बाबू अपनी सीट से गायब थे। उक्त कक्ष में दिव्यांगों को बंटने वाली ट्राइसिकिल धूल से भरी हुई रखी थीं। खास बात ये थी कि बाबू एक भी नहीं थे उनकी कुर्सियां अवश्य दो पंखों से हवा खा रहे थे।

यहां एक-दो लोग अपनी शिकायत लेकर आए थे उनका कहना था हम बहुत देर से यहां खड़े हैं कार्यालय खुला है, कोई नहीं हैं।

बीईओ कार्यालय
समय: दोपहर 12.50 बजे
ये मिली स्थिति- ब्लॉक शिक्षा अधिकारी कार्यालय का कक्ष बाहर से बंद था। यहां बाहर बैठने वाला भी गायब था। अंदर जाकर देखा तो एक कमरे में दो लोग बैठे हुए बतिया रहे थे। बीईओ कार्यालय के अंदर एक बाबू की मोटर साइकिल बाहर की जगह अंदर खड़ी हुई दिखी। वहीं ट्राइसिकिल भी धूल खाती हुई दिखी। जबकि इन्हें समय रहते अगर विकलांगों को वितरित कर दिया जाता तो यह उनके काम आ सकती थीं।

जिला प्रौढ़ शिक्षा अधिकारी कार्यालय
समय: दोपहर 12.55 बजे
ये मिली स्थिति- जिला प्रौढ़ शिक्षा अधिकारी कार्यालय जीर्ण-शीर्ण हालत में मिला, जिसमें जगह-जगह दरारें मिलीं, दो बाबू एक जगह चर्चा करते देखे गए। यहां देखने के लिए धूम्रपान वर्जित है लिखा हुए का पर्चा चिपका था, मगर जगह-जगह तम्बाकू के धब्बे लगे थे।

डीपीसी कार्यालय
समय: दोपहर 01.00 बजे
ये मिली स्थिति- कार्यालय परिसर में घुसते ही दो लोग पहरेदारी करते मिले। जिला परियोजना समन्वयक जिला शिक्षा केंद्र का कक्ष बंद मिला। उनके जानने पर मालूम पड़ा कि वे चांचौड़ा अंत्योदय मेले में शामिल होने गए हैं। कुछ लोग अपना काम करते देखे गए। एक-दो बाबू अपनी सीट से गायब थे। जिनके बारे में कोई जानकारी नहीं मिल सकी।

डीपीसी का मामला विधानसभा तक पहुंचा
प्रभारी डीपीसी के रूप में काम कर रहे आशीष टांटिया का मामला चांचौड़ा की भाजपा विधायक ममता मीणा ने विधानसभा में उठाया है। जिसमें उन्होंने कहा कि आशीष टांटिया मूल रूप से हाईस्कूल के प्राचार्य हैं और उनको डीपीसी का चार्ज वरिष्ठता को नजर अंदाज करते हुए दिया गया है।

जबकि जिले में टांटियां से वरिष्ठ प्राचार्य और अन्य अधिकारी भी हैं। मीणा ने पूछा कि टांटिया से कब तक जिला परियोजना का अतिरिक्त प्रभार वापस लिया जाएगा। यहां एक साल से डीपीसी नहीं हैं। इस पद पर लंबे समय से प्रभारी से काम चलाया जा रहा है। डीपीसी को लेकर दूसरे जनप्रतिनिधि भी समय-समय पर शिकायत करते रहे हैं। मीणा ने अपने सवाल में टांटिया के कार्यकाल की जांच भी कराने की बात कही है।

शिकायतों के बाद भी नहीं होती कार्रवाई: डीईओ कार्यालय में काम से आए कुछ लोगों ने पत्रिका को बताया यह कार्यालय तो पूरी तरह भगवान भरोसे है जहां बगैर पैसे के कोई भी काम कराना आसान नहीं हैं। उनका आरोप था कि डीईओ के नजदीकी चन्द्रपाल सिंह रघुवंशी के कहने पर ही सारे काम यहां होते हैं।

उन्होंने कहा कि यहां तो केवल अराजकता और भ्रष्टाचार का बोलबाला है। इस संबंध में जब डीईओ संजय श्रीवास्तव से चर्चा की तो उन्होंंने मीटिंग में होना बताया।

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Published on:
10 Mar 2018 02:49 pm
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